Article 108 of Indian Constitution | Joint sitting of both Houses in certain cases
Автор: Shailesh Jain Advocate
Загружено: 2021-10-05
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Article 108 of Indian Constitution | Joint sitting of both Houses in certain cases | कुछ दशाओं में दोनों सदनों की सयुंक्त बैठक
Section 108 in The Constitution in Hindi
इस आर्टिकल में मै आपको “ कुछ दशाओं में दोनों सदनों की सयुंक्त बैठक | भारतीय संविधान अनुच्छेद 108 | Article 108 of Indian Constitution in Hindi | Article 108 in Hindi | भारतीय संविधान का अनुच्छेद 108 | Joint sitting of both Houses in certain cases ” के विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –
भारतीय संविधान अनुच्छेद 108 | Article 108 of Indian Constitution in Hindi
[ Indian Constitution Article 108 in Hindi ] –
कुछ दशाओं में दोनों सदनों की सयुंक्त बैठक–
(1) यदि किसी विधेयक के एक सदन द्वारा पारित किए जाने और दूसरे सदन को पारेषित किए जाने के पश्चात् ,–
(क) दूसरे सदन द्वारा विधेयक अस्वीकर कर दिया गया है, या
(ख) विधेयक में किए जाने वाले संशोधनों के बारे में दोनों सदन अंतिम रूप से असहमत हो गए हैं, या
(ग) दूसरे सदन को विधेयक प्राप्त होने की तारीख से उसके द्वारा विधेयक पारित किए बिना छह मास से अधिक बीत गए हैं, तो उस दशा के सिवाय जिसमें लोक सभा का विघटन होने के कारण विधेयक व्यपगत हो गया है, राष्ट्रपति विधेयक पर विचार-विमर्श करने और मत देने के प्रयोजन के लिए सदनों को सयुंक्त बैठक में अधिवेशित होने के लिए आहूत करने के अपने आशय की सूचना, यदि वे बैठक में हैं तो संदेश द्वारा या यदि वे बैठक में नहीं हैं तो लोक अधिसूचना द्वारा देगा :
परन्तु उस खंड की कोई बात धनविधेयक को लागू नहीं होगी ।
(2) छह मास की ऐसा अवधि की गणना करने में, जो खंड (1) में निर्दिष्ट है, किसी ऐसी अवधि कोहिसाब में नहीं लिया जाएगा जिसमें उक्त खंड के उपखंड (ग) में निर्दिष्ट सदन सत्रावसित या निरंतर चार से अधिक दिनों के लिए स्थगित कर दिया जाता है ।
(3) यदि राष्ट्रपति ने खंड (1) के अधीन सदनों को सयुंक्त बैठक में अधिवेशित होने के लिए आहूत करने के अपने आशय की सूचना दे दी है तो कोई भी सदन विधेयक पर आगे कार्यवाही नहीं करेगा, किन्तु राष्ट्रपति अपनी अधिसूचना की तारीख के पश्चात् किसी समय सदनों को अधिसूचना में विनिर्दिष्ट प्रयोजन के लिए सयुंक्त बैठक में अधिवेशित होने के लिए आहूत कर सकेगा और, यदि वह ऐसा करता है तो, सदन तद्नुसार अधिवेशित होंगे ।
(4) यदि सदनों की सयुंक्त बैठक में विधेयक ऐसे संशोधनों सहित, यदि कोई हों, जिन पर सयुंक्त बैठक में सहमति हो जाती है, दोनों सदनों के उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों की कुल संख्या के बहुमत द्वारा पारित हो जाता है तो इस संविधान के प्रयोजनों के लिए वह दोनों सदनों द्वारा पारित किया गया समझा जाएगा :
परन्तु सयुंक्त बैठक में —
(क) यदि विधेयक एक सदन से पारित किए जाने पर दूसरे सदन द्वारा संशोधनों सहित पारित नहीं कर दिया गया है और उस सदन को, जिसमें उसका आरंभ हुआ था, लौटा नहीं दिया गया है तो ऐसे संशोधनों से भिन्न (यदि कोई हों), जो विधेयक के पारित होने में देरी के कारण आवश्यक हो गए हैं, विधेयक में कोई और संशोधन प्रस्थाफित नहीं किया जाएगा ;
(ख) यदि विधेयक इस प्रकार पारित कर दिया गया है और लौटा दिया गया है तो विधेयक में केवल पूर्वोक्त संशोधन, और ऐसे अन्य संशोधन, जो उन विषयों से सुसंगत हैं जिन पर सदनों में सहमति नहीं हुई है, प्रस्थाफित किए जाएंगे ,
और पीठासीन व्यक्ति का इस बारे में विनिश्चय अंतिम होगा कि कौन से संशोधन इस खंड के अधीन ग्राह्य हैं ।
(5) सदनों की सयुंक्त बैठक में अधिवेशित होने के लिए आहूत करने के अपने आशय की राष्ट्रपति की सूचना के पश्चात्, लोक सभा का विघटन बीच में हो जाने पर भी, इस अनुच्छेद के अधीन सयुंक्त बैठक हो सकेगी और उसमें विधेयक पारित हो सकेगा ।
भारतीय संविधान अनुच्छेद 108
[ Indian Constitution Article 108 in English ] –
“Joint sitting of both Houses in certain cases ”–
(1) If after a Bill has been passed by one House and transmitted to the other House—
(a) the Bill is rejected by the other House; or
(b) the Houses have finally disagreed as to the amendments to be made in the Bill; or
(c) more than six months elapse from the date of the reception of the Bill by the other House without the Bill being passed by it,
the President may, unless the Bill has elapsed by reason of a dissolution of the House of the People, notify
to the Houses by message if they are sitting or by public notification if they are not sitting, his intention to summon them to meet in a joint sitting for the purpose of deliberating and voting on the Bill:
Provided that nothing in this clause shall apply to a Money Bill.
(2) In reckoning any such period of six months as is referred to in clause (1), no account shall be taken of any period during which the House referred to in sub-clause (c) of that clause is prorogued or adjourned for more than four consecutive days.
(3) Where the President has under clause (1) notified his intention of summoning the Houses to meet in a joint sitting, neither House shall proceed further with the Bill, but the President may at any time after the date of his notification summon the Houses to meet in a joint sitting for the purpose specified in the notification and, if he does so, the Houses shall meet accordingly.
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