Pankaj Tripathi speaks about Sanjeev Kumar : पंकज त्रिपाठी ने गाये संजीव कुमार के गुणगान
Автор: CINE SAGA
Загружено: 2025-01-23
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@CINESAGA-2025 Pankaj Tripathi explains how most of the actors learned from Sanjeev Kumar
पंकज त्रिपाठी द्वारा संजीव कुमार की तारीफ
पंकज त्रिपाठी, जो आज के समय में अपने बेहतरीन और प्राकृतिक अभिनय के लिए जाने जाते हैं, संजीव कुमार को अपना आदर्श मानते हैं। उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा था:
“संजीव कुमार जैसे अभिनेता बार-बार नहीं आते। उनका अभिनय सहज था, लेकिन गहराई से भरा हुआ। वह किरदार को जीते थे, उसे निभाते नहीं थे।”
पंकज त्रिपाठी का मानना है कि संजीव कुमार का करियर हर अभिनेता के लिए एक प्रेरणा है। उन्होंने कहा:
“संजीव कुमार की सबसे बड़ी ताकत यह थी कि वे किरदार में इतनी ईमानदारी से उतरते थे कि आप उनकी हर भाव-भंगिमा से जुड़ाव महसूस करते थे। उनकी फिल्में आज भी अभिनय सिखाने के लिए देखी जाती हैं।”
पंकज त्रिपाठी ने अंगूर और कोशिश जैसी फिल्मों का जिक्र करते हुए कहा कि इन फिल्मों में संजीव कुमार का काम उन्हें बार-बार प्रेरित करता है। उन्होंने यह भी कहा:
“संजीव जी का करियर हर अभिनेता को सिखाता है कि एक सच्चे कलाकार के लिए ग्लैमर से ज्यादा महत्वपूर्ण उसका हुनर है।”
संजीव कुमार: भारतीय सिनेमा के बहुमुखी कलाकार
संजीव कुमार भारतीय सिनेमा के उन महान अभिनेताओं में से एक हैं, जिन्होंने अपनी सरलता, अभिनय की गहराई और अद्वितीय शैली से हिंदी फिल्म उद्योग में अमिट छाप छोड़ी। असली नाम हरिहर जरीवाला रखने वाले संजीव कुमार का जन्म 9 जुलाई 1938 को सूरत, गुजरात में हुआ था। अभिनय के प्रति उनका जुनून उन्हें बॉलीवुड तक ले आया, जहां उन्होंने अपने अभिनय से हर किरदार को जीवंत बना दिया।
प्रारंभिक जीवन और करियर की शुरुआत
संजीव कुमार ने अपने करियर की शुरुआत थिएटर से की। इसके बाद उन्होंने फिल्मों में कदम रखा और धीरे-धीरे अपनी जगह बनाई। 1965 में आई फिल्म निशान उनकी शुरुआती फिल्मों में से एक थी। लेकिन उन्हें असली पहचान 1970 के दशक में मिली, जब उन्होंने अपने अभिनय का जादू बड़े पर्दे पर बिखेरा।
अभिनय की विविधता
संजीव कुमार अपनी बहुमुखी प्रतिभा के लिए प्रसिद्ध थे। उन्होंने हर तरह की भूमिकाओं में अपना लोहा मनवाया – चाहे वह गंभीर किरदार हो, रोमांटिक हीरो हो, या फिर हास्य भूमिकाएं।
• अभिनय की ऊंचाइयां: उनकी फिल्में जैसे खिलौना (1970), कोशिश (1972), और आंधी (1975) उनकी संवेदनशील और गहन अभिनय क्षमता को दर्शाती हैं।
• गंभीर भूमिकाएं: शोले (1975) में ठाकुर बलदेव सिंह के किरदार में उनका प्रदर्शन आज भी याद किया जाता है। उनके बिना यह किरदार अधूरा लगता।
• हास्य और विविधता: अंगूर (1982) में उनका डबल रोल और कॉमिक टाइमिंग भारतीय सिनेमा में हास्य का उत्कृष्ट उदाहरण है।
व्यक्तिगत जीवन और संघर्ष
संजीव कुमार का व्यक्तिगत जीवन काफी संघर्षों और चुनौतियों से भरा हुआ था। उन्होंने शादी नहीं की और अपनी जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव देखे। लेकिन उनका फोकस हमेशा उनके काम पर रहा।
योगदान और सम्मान
संजीव कुमार ने अपने करियर में कई राष्ट्रीय और फिल्मफेयर पुरस्कार जीते। कोशिश और दस्तक जैसी फिल्मों के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। उनकी फिल्मोग्राफी यह दिखाती है कि सच्चा कलाकार अपनी प्रतिभा के जरिए अमर हो सकता है।
निष्कर्ष
संजीव कुमार भारतीय सिनेमा के उन रत्नों में से एक हैं, जिनकी प्रतिभा और योगदान सदैव याद किए जाएंगे। उनकी सादगी, बहुआयामी अभिनय और कहानी को जीवंत करने की क्षमता उन्हें भारतीय सिनेमा का अमूल्य धरोहर बनाती है। उनकी प्रशंसा में पंकज त्रिपाठी जैसे कलाकारों के शब्द यह साबित करते हैं कि सच्चे कलाकार कभी समय के बंधन में नहीं बंधते, वे अपनी कला से हमेशा अमर रहते हैं।
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