कॉलेज
Автор: Express shots
Загружено: 2026-01-15
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*क्या आपको पता है कि अब कॉलेज और यूनिवर्सिटी में जाति-आधारित भेदभाव करना सिर्फ गलत नहीं, बल्कि सीधे UGC के नए नियमों का उल्लंघन माना जाएगा?*
जी हाँ! University Grants Commission (UGC) ने देश भर के उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए **नए और सख्त नियम जारी किए हैं**, जिनका नाम है — *Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026*। इन नियमों का एक ही मकसद है — **SC, ST और OBC छात्रों के साथ किसी भी तरह के भेदभाव को पूरी तरह खत्म करना**। अब भेदभाव चाहे खुला हो या छुपा हुआ, व्यवहार में हो या फैसलों में — सब UGC की नजर में आएगा।
अब सवाल उठता है — *UGC भेदभाव को कैसे परिभाषित करता है?*
नए नियमों के अनुसार, अगर किसी छात्र या शिक्षक के साथ **जाति, जन्म, लिंग, धर्म, विकलांगता या सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर अन्यायपूर्ण या पक्षपातपूर्ण व्यवहार होता है**, तो वह साफ-साफ भेदभाव माना जाएगा। खास बात यह है कि नए नियमों में परिभाषा को सरल किया गया है, लेकिन इसका दायरा पहले से ज्यादा व्यापक है। पुराने 2012 के नियमों में जो उदाहरण दिए जाते थे — जैसे अलग बैठाना, अलग समूह बनाना — अब उन्हें हटाया गया है, लेकिन **भेदभाव की गंभीरता को और मजबूत तरीके से पेश किया गया है**।
अब सुनिए सबसे बड़ा बदलाव — *हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी में Equal Opportunity Centre (EOC) और Equity Committee बनाना अनिवार्य कर दिया गया है।*
इन कमेटियों में SC, ST, OBC, महिलाओं और दिव्यांग व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व जरूरी होगा। अगर कोई छात्र शिकायत करता है, तो *24 घंटे के अंदर कमेटी को मीटिंग करनी होगी**, **15 कार्यदिवस में जांच पूरी करनी होगी**, और **7 दिन में संस्थान प्रमुख को कार्रवाई करनी होगी**। सिर्फ इतना ही नहीं — हर कैंपस में **Equity Helpline और Equity Squad* भी होगी, ताकि भेदभाव को शुरुआत में ही रोका जा सके। शिकायत करने वाले की पहचान और सुरक्षा की जिम्मेदारी भी संस्थान की होगी।
अब आख़िरी और सबसे अहम बात — *अगर कोई संस्थान इन नियमों का पालन नहीं करता, तो क्या होगा?*
UGC ने साफ कर दिया है कि ऐसे कॉलेज या यूनिवर्सिटी पर *कड़ी कार्रवाई* हो सकती है —
UGC की योजनाओं से बाहर किया जा सकता है,
नए कोर्स या डिग्री चलाने की अनुमति रोकी जा सकती है,
ऑनलाइन और डिस्टेंस लर्निंग पर भी रोक लग सकती है,
और ज़रूरत पड़ी तो **संस्थान की मान्यता तक खत्म की जा सकती है**।
हालाँकि, एक राहत की बात यह है कि ड्राफ्ट में जो झूठी शिकायत पर सजा का प्रावधान था, उसे अंतिम नियमों से हटा दिया गया है। साथ ही, इन सभी नियमों की निगरानी के लिए *राष्ट्रीय-स्तर की मॉनिटरिंग कमेटी* भी बनाई जाएगी।
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