Kashmir flood victims get houses from Jamiat
Автор: Arshad Madani
Загружено: 2026-02-07
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@ArshadMadani007
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जम्मू-कश्मीर के बाढ़ प्रभावितों ने कहा शुक्रिया मौलाना मदनी,
आपने हमारे दर्द को महसूस किया । दिलासा तो सबने दिया,
मगर काम जमीयत उलमा-ए-हिंद ने ही किया.
आज पहले चरण में उधमपुर (जम्मू-कश्मीर) में 15 नव-निर्मित मकानों का वितरण करते हुए बाढ़ प्रभावित 7 विधवाओं सहित लोगों को चाबियां सौंपते समय जमीयत
उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने पंजाब,
हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में आई तबाही पर कहा कि हम मालिक-ए-कायनात के बंदे हैं,
इसलिए उसके हर फ़ैसले पर सर झुकाना हमारा फ़र्ज़ है,
क्योंकि वही हर परेशानी का इलाज करने वाला है। हालांकि ऐसे मौको पर अपने स्तर पर जमीयत उलमा-ए-हिंद,
उसके कार्यकर्ता और उसकी शाखाएं यथासंभव प्रभावितों की मदद कर रही हैं।
अंत में मौलाना मदनी ने कहा:
नफ़रत के सौदागर और हिंदू राष्ट्र का सपना देखने वालों को नेपाल से सबक लेना चाहिए। एक दिन ऐसा भी अवश्य आएगा जब ज़ालिमों के गले में ज़ंजीरें होंगी और देश एक बार फिर प्यार,
मोहब्बत और इंसाफ़ के साये (रास्ते) में तरक़्क़ी करेगा।
सांप्रदायिक शक्तियाँ और कुछ संगठन हिंदू राष्ट्र बनाने का सपना देख रहे हैं,
जबकि उन्हें अपने पड़ोसी देश नेपाल के इतिहास से सीख लेनी चाहिए। हाल के समय में नेपाल में भी इसी तरह की विचारधारा रखने वालों ने हिंदू राष्ट्र स्थापित किया था,
लेकिन अंततः वह व्यवस्था समाप्त हो गई और वहाँ लोकतांत्रिक संविधान के तहत एक नई व्यवस्था अस्तित्व में आई। इस तथ्य से स्पष्ट होता है कि वर्तमान वैश्विक
परिस्थितियों में किसी भी देश की वास्तविक प्रगति,
स्थिरता और जनकल्याण तभी संभव है जब वहाँ लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा हो,
न कि किसी एक धर्म या विचारधारा को राष्ट्र पर थोपकर।
सांप्रदायिक तत्वों की देश को हिंदू राष्ट्र बनाने की कोई भी साज़िश सफल नहीं हो पाएगी। सेक्युलरिज़्म और भारतीय संविधान की रक्षा के लिए जमीयत
उलमा-ए-हिंद अंतिम सांस तक संघर्ष जारी रखेगी। इतिहास बताता है कि जो क़ौम अपनी पहचान,
संस्कृति और धर्म के साथ जीना चाहती है,
उसे कुर्बानियाँ देनी पड़ती हैं।
सांप्रदायिक ताकतें इस्लाम और मुसलमान दोनों को मिटाने के प्रयास में हैं,
लेकिन शायद उन्हें यह नहीं मालूम कि इस्लाम का यह चिराग कभी बुझ नहीं सकता और जिन्होंने इसे बुझाने की कोशिश की,
वे स्वयं मिट गए। हम एक जीवित क़ौम हैं,
और जीवित क़ौमें निराश होने के बजाय अपनी समझ,
दूरदर्शिता और रणनीति से सफलता की नई कहानी लिखती हैं।
मौलाना अरशद मदनी
अध्यक्ष, जमीयत उलमा-ए-हिंद
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