हैदराबाद की अद्भुत विरासत: कुतुब शाही मकबरे | The Amazing Heritage of Hyderabad: Qutb Shahi Tomb
Автор: Peepul Tree World
Загружено: 2021-06-29
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हैदराबाद के गोलकोंडा क़िले के पास मौजूद ये शानदार मक़बरे निशानी है उस राजवंश की जिसने एक समय भारत के सबसे अमीर राज्यों पर शासन किया था।
ये हैं क़ुतुब शाही राजवंश के मक़बरे जो आज भी हैदराबाद के इतहास और वास्तुकला की शान हैं। ये मक़बरे क़ुतुब शाही सुल्तान, उनके परिवार और दरबार के लोगों के हैं। इनकी सुंदरता और भव्य वास्तुकला क़ुतुब शाही शासकों के गौरव को आज भी संजोये हुए है।
16वीं शताब्दी में क़ुतुब शाही सुल्तानों ने दक्खन में गोलकोंडा से 1518 और 1687 के बीच राज किया था। क्या आप जानते हैं की गोलकोंडा एक समय पूरे विश्व के सबसे समृद्ध और अमीर राज्यों में से एक था? इसका कारण था गोलकोंडा की हीरे की खानें, जिसकी वजह से ये कई सालों तक पूरे दुनिया में हीरों की राजधानी के रूप में जाना जाता था। 18वीं और उन्नीसवीं शताब्दी तक भी गोलकोंडा के हीरों की वजह से ये सबसे महत्वपूर्ण शहरों में से एक था। गोलकोंडा से ही क़ुतुब शाही शासन की शुरआत हुई थी।
राजवंश के संस्थापक थे कुली कुतुब-उल-मुल्क, जो दक्कन आये और कर्णाटक के बीदर के बहमनी सुल्तानों की सेवा में लग गए। 1518 ईस्वी में बहमनी साम्राज्य के पतन के बाद, कुली कुतुब-उल-मुल्क ने अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की और गोलकोंडा को अपनी राजधानी बनाया। क़ुतुब शाही राजवंश ने लगभग 170 वर्षों तक शासन किया और सन 1687 तक मुगल हमले का सफलतापूर्वक विरोध किया।
आज के हैदराबाद शहर को बसाने का श्रेय भी क़ुतुब शाही को ही जाता है। पांचवे सुल्तान, मुहम्मद कुली क़ुतुब शाह ने 1591 में हैदराबाद की स्थापना की। क़ुतुब शाही शासक महान निर्माता और शिक्षा और कला के संरक्षक थे। उनके समय की इमारतें आज भी देखने को मिलती हैं जैसे प्रसिद्द चारमीनार और गोलकोंडा क़िला। उनकी इमारतें वास्तुकला की एक नयी शैली को दर्शाती हैं जो दक्खन में गुलबर्गा, बीदर, बीजापुर से भिन्न थी।
क़ुतुब शाही मकबरों की गिनती भी उनकी सबसे भव्य संरचनाओं में होती है। यहाँ कम से कम 30 मक़बरे हैं। ये फारसी, पठान और हिंदू कला के मिश्रण से बने हैं। मकबरों के अलावा यहाँ मस्जिद और स्नान की जगह भी हैं। दिलचस्प बात ये है कि यहाँ आपको कई अलग अलग तरीकों के मक़बरे देखने को मिलेंगे - बड़े, छोटे, एक मंजिला, दो मंज़िला और खुली छत वाले भी।
इन मकबरों की शिल्पकला और डिज़ाइन देखने लायक हैं। गुंबदों को मूल रूप से नीले और हरे रंग की टाइलों से सजाया गया था, जिनमें से अब केवल कुछ टुकड़े रह गए हैं। सुल्तान मुहम्मद कुली कुतुब शाह का मकबरा कुतुब शाही मकबरों में सबसे भव्य माना जाता है।
एक और ध्यान देने वाली बात ये है कि यहाँ इसमें राजवंश के पांच सुल्तानों के अभिलेखीय रूप से प्रलेखित कब्रें शामिल हैं। इस समूह में क़ुतुब शाही के आखिरी सुल्तान अबुल हसन कुतुब शाह का मकबरा नहीं हैं क्योंकि उन्हें बंधी बनाकर महाराष्ट्र के दौलताबाद क़िले ले जाया गया था और उनकी कब्र खुल्दाबाद में है।
इन क़ुतुब शाही स्मारकों पर हाल ही में restoration का काम किया गया है। आज भी ये पूरा समूह कुतुब शाही राजवंश और हैदराबाद और गोलकोंडा में उनकी समृद्धि के प्रतीक हैं
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