तनोट माता मंदिर||भारत पाकिस्तान बार्डर की रक्षक देवी||1965/1971 भारत पाकिस्तान युद्ध की साक्षी ||
Автор: Deepak Noor Official
Загружено: 2022-12-16
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तनोट माता-युद्ध वाली चमत्कारी देवी||1965/1971 भारत पाकिस्तान के युद्ध की साक्षी||पाकिस्तान के 3000 बम बाल भी बांका नहीं कर सकें मंदिर का ||
तनोट माता मंदिर के बारे में बहुत से लोग जानते होंगे, जो व्यक्ति ट्रेवल करते है या फिर जिन्हें एक जगह से दूसरी जगह घूमना पसंद है उन्हें तनोट माता के मंदिर के बारे में पता होगा लेकिन बहुत से ऐसे लोग भी है जिन्हें इस मंदिर के बारे में पता नही होगा।उनके लिए इस मंदिर का इतिहास जानना बहुत ही रोचक होगा तो आज में आपको आर्टिकल में तनोट माता मंदिर के बारे में सब कुछ बताऊँगा।
||तनोट माता मंदिर की कहानी||
तनोट माता मंदिर राजस्थान राज्य में स्थित है। यह मंदिर जैसलमेर से लगभग 130 किलोमीटर की दूरी पर भारत-पाकिस्तान की बॉर्डर सीमा के निकट स्थित है।यह करीब 1200 साल प्राचीन मंदिर है। जैसा कि मैंने आपको इस लेख की शुरुआत में भी बताया था कि भारत में बहुत से मंदिर है और सभी मंदिर अपने चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध है। इसी प्रकार तनोट माता मंदिर में भी हमेशा से ही लोगों की आस्था व विश्वास रहा है।
लेकिन इस मंदिर ने अपना चमत्कार सन 1965 में दिखाया। उस समय भारत-पाकिस्तान का युद्ध चल रहा था और उसी समय अपने कार्यों की वजह से यह मंदिर देश-विदेश में अपने चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध हो गया।जब सन 1965 के सितंबर महीने में भारत-पाकिस्तान युद्ध प्रारम्भ हुआ तो पाकिस्तानी सेना ने पूरब में किशनगढ़ से 74 किलोमीटर दूर बुइली पर अपना कब्जा कर लिया था और पश्चिम में साधेवाला से शाहगढ़ तक अपना अधिकार कर लिया था।
उत्तर में अछरी टीबा से 6 किलोमीटर दूर तक अपना के क्षेत्र पर अपना कब्जा कर लिया था तनोट माता मंदिर तीन दिशाओं से घिर चुका था। अब स्थिति ऐसी हो चुकी थी कि यदि पाकिस्तानी सेना इस मंदिर पर कब्जा कर ले तो वह रामगढ़ से लेकर शाहगढ़ तक के इलाके पर अपना अधिकार स्थापित कर सकता था। अब तनोट माता मंदिर पर अधिकार स्थापित करना भारत ओर पाकिस्तान दोनों के लिए महत्वपूर्ण हो गया था।
पाकिस्तानी सेना ने 17-19 नवंबर 1965 को तीन अलग दिशाओं से तनोट माता मंदिर पर आक्रमण किया। पाकिस्तानी सेना का यह आक्रमण तोप के द्वारा किया था और तोपों के गोलों की बरसात तनोट माता मंदिर पर जो रही थी।जवाब में तनोट माता के मंदिर की रक्षा के लिए मेज़र जय सिंह की कमांड में 13 ग्रेन्दिर की एक कम्पनी और सीमा सुरक्षा बल की 2 कंपनियां पाकिस्तान की पूरी ब्रिगेड का सामना कर रही थी।जैसलमेर से Tanot Mata Temple जाने वाले मार्ग को घंटाली देवी मंदिर के पास एन्टी पर्सनल और एन्टी टैंक माइन्स लगाकर सप्लाई चैन को काट दिया था।
पकिस्तानी सेना ने फिर तनोट माता मंदिर को निशाना बनाया ओर इस मंदिर पर हजारों गोले दागे। इस युद्ध में पाकिस्तानी सेना ने इस मंदिर पर लगभग 3000 से भी ज्यादा बम गिराए लेकिन इस मंदिर पर खरोंच तक नही लगी।यहाँ तक कि इस मंदिर के आँगन में गिरे लगभग 450 बम तो फटे तक नही। यह नजारा देख कर दोनों सेनाएँ आश्चर्यचकित थी। भारतीय सैनिकों ने मन की तनोट माता हमारें साथ है ओर वह हमारी रक्षा करेंगी।कम संख्या में होनें के बाद भी भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना को करारा जवाब दिया और उसके सैकड़ो सैनिकों को मार गिराया। इसके बाद पाकिस्तानी सेना ने घुटने टेक दिए ओर भागने को मजबूर हो गए।
कहा जाता है कि तनोट माता ने सैनिकों के सपनें में आकर कहा था कि जब तक तुम सब मेरें मंदिर में हो, मैं तुम सभी की रक्षा करूँगी। सैनिकों की तनोट माता मंदिर की इस ऐतिहासिक जीत को देश के सभी अखबारों ने अपनी मुख्य खबर बनाया।1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद इस मंदिर की सुरक्षा का जिम्मा, सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने ले लिया ओर यहाँ पर अपनी एक चौकी भी बना ली।
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