Baba balak nath Deotsidh
Автор: Shinewithsam
Загружено: 2026-01-16
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Baba balak nath Deotsidh
📿 Deotsidh | Baba Balak Nath Ji | पौणाहारी बाबा | Hamirpur Himachal Pradesh
🙏 जय बाबा बालक नाथ जी 🙏
नमस्कार दोस्तों,
इस वीडियो में हम आपको लेकर चले हैं हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर ज़िले में स्थित देओतसिद्ध धाम, जहाँ विराजमान हैं बाबा बालक नाथ जी (पौणाहारी बाबा)। यह स्थान न केवल एक मंदिर है, बल्कि आस्था, तपस्या और चमत्कारों का जीवंत केंद्र है।
बाबा बालक नाथ जी को भगवान शिव का अवतार माना जाता है। कहा जाता है कि बाबा आज भी यहाँ धूनी रूप में विराजमान हैं और अपने भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं।
बाबा बालक नाथ जी (सिद्ध बाबा बालक नाथ) की कथा हिंदू धर्म और विशेषकर उत्तर भारत (हिमाचल प्रदेश और पंजाब) में बहुत श्रद्धा के साथ सुनी जाती है। उन्हें भगवान शिव का अंश और 'कलियुग' के सिद्ध पुरुष के रूप में पूजा जाता है।
यहाँ बाबा बालक नाथ जी की संक्षिप्त और पावन कथा दी गई है:
पौराणिक जन्म कथा
मान्यता है कि बाबा बालक नाथ जी का जन्म किसी साधारण गर्भ से नहीं हुआ था। वे भगवान शिव के मानस पुत्र माने जाते हैं। एक कथा के अनुसार, जब भगवान शिव अमरनाथ गुफा में माता पार्वती को "अमर कथा" सुना रहे थे, तब एक शुक (तोते का बच्चा) ने वह कथा सुन ली थी। भगवान शिव के क्रोध से बचने के लिए वह शुक उड़कर ऋषि व्यास की पत्नी के मुख के माध्यम से उनके गर्भ में प्रविष्ट हो गया और बाद में एक बालक के रूप में जन्म लिया। यही बालक आगे चलकर सिद्ध बाबा बालक नाथ कहलाए।
माता रत्नो और बाबा बालक नाथ
बाबा बालक नाथ जी की सबसे प्रचलित कथा माता रत्नो के साथ उनके जुड़ाव की है:
• बालक का आगमन: बाबा बालक नाथ जी बालक रूप में विचरण करते हुए हिमाचल प्रदेश के 'शाहतलाई' नामक स्थान पर पहुँचे। वहाँ उनकी मुलाकात माता रत्नो से हुई। माता रत्नो की कोई संतान नहीं थी, उन्होंने बाबा को अपना धर्म-पुत्र मान लिया।
• सेवा की शर्त: बाबा ने माता रत्नो की गौ माता को चराने की जिम्मेदारी ली। शर्त यह थी कि माता उन्हें खाने के लिए रोटी और लस्सी देंगी।
• चमत्कार: यह सिलसिला 12 वर्षों तक चला। एक दिन गांव वालों ने माता रत्नो को ताना मारा कि बालक गौवें चराने के बहाने सोता रहता है और उनकी फसल खराब हो रही है। माता रत्नो ने जब बाबा से शिकायत की, तो बाबा ने चमत्कार दिखाया। उन्होंने अपनी शक्ति से 12 साल की पुरानी रोटियां और लस्सी (जो उन्होंने खाई नहीं थी बल्कि एक पेड़ के नीचे छिपा दी थी) सुरक्षित निकाल कर दिखाई।
• सिद्ध रूप: जब माता रत्नो को अपनी भूल का अहसास हुआ, तब तक बाबा अपने असली सिद्ध रूप में आ चुके थे। उन्होंने माता से विदा ली और धौलगिरी की पहाड़ियों की ओर चल दिए।
द्योटसिद्ध (Deotsidh) गुफा
बाबा बालक नाथ जी जब शाहतलाई से निकले, तो वे पहाड़ियों के बीच एक गुफा में जाकर तपस्या करने लगे। आज इसी स्थान को 'द्योटसिद्ध' के नाम से जाना जाता है।
• ब्रह्मचारी स्वरूप: बाबा ने आजीवन बाल-ब्रह्मचारी रहने का संकल्प लिया था।
• स्त्रियों का प्रवेश: बाबा के ब्रह्मचारी स्वरूप के सम्मान में, उनकी मुख्य गुफा के अंदर महिलाओं का जाना वर्जित था (हालांकि अब एक ऊंचे चबूतरे से महिलाएं दर्शन कर सकती हैं)।
बाबा बालक नाथ जी के मुख्य संदेश
1. परोपकार: जीव-जंतुओं और गौ माता की सेवा।
2. भक्ति और त्याग: सांसारिक मोह-माया को त्याग कर ईश्वर की भक्ति में लीन होना।
3. समानता: वे सभी भक्तों को एक समान दृष्टि से देखते हैं, चाहे वे किसी भी जाति या वर्ण के हों।
महत्वपूर्ण जानकारी
• प्रसाद: बाबा को मुख्य रूप से 'रौट' (गुड़ और आटे से बना मीठा रोट) चढ़ाया जाता है।
• जयकारा: भक्त श्रद्धा से "जो बोले सो निर्भय, बाबा बालक नाथ महाराज की जय" का उद्घोष करते हैं।
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