Sānt Te Swayaṁ Hāri (संत ते स्वयं हरि...) |
Автор: iHariPrabodham
Загружено: 2026-02-10
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Описание:
Sant Te Swayam Hari is a timeless pad by Sadguru Nishkulanand Swami, re-envisioned in an electro-trance soundscape to resonate with the present generation. Ancient spirituality and sant-mahima meet contemporary rhythm, making divine wisdom accessible, immersive, and alive. The concluding verses by H Das bridge tradition and today, inspiring modern hearts to experience the Sant as the living presence of Shri Hari.
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[Instrumental]
धन्य धन्य ए संत सुजाणने, जेनुं उलटी पलट्यूं आप…
संत ते स्वयं हरि…
आप मटी मळ्या , भगवानमां, जेना आपमां हरिनो व्याप…
संत ते स्वयं हरि…
जेना शीशमां शीश छे श्यामनुं, जेना नेणमां नाथनां नेण…
संत ते स्वयं हरि…
जेना मुखमां मुख महाराजनुं, जेना वेणमां वा’लानां वेण…
संत ते स्वयं हरि…
जेना कानमां कान छे कृष्णना, जेना नाकमां नासिका नाथ…
संत ते स्वयं हरि…
[Instrumental]
जेनी जीभामां जीभा जीवननी, जेना हाथमां हरिना हाथ…
संत ते स्वयं हरि…
जेना हृदयमां हृदय हरि तणुं, जेना पावमां प्रभुना पाव…
संत ते स्वयं हरि…
जेम हीरो हीरा वडे वेंधिये, तेम थयो ते सहज समाव…
संत ते स्वयं हरि…
एम संतमां रह्या छे श्रीहरि, माटे संत छे सुखनुं धाम…
संत ते स्वयं हरि…
धर्म भक्ति वैराग्य ने ज्ञान जे, तेने रहेवानुं संत छे ठाम…
संत ते स्वयं हरि…
एवा संत शिरोमणि क्यां मणे, जेणे देहबुद्धि करी दूर…
संत ते स्वयं हरि…
कहे निष्कुणानंद एने संगे, ऊगे अंतरे आनंद सूर…
संत ते स्वयं हरि…
[Instrumental]
जेनां रोमे रोममां श्री हरि , जेनां कार्यमां व्याप छे श्री हरि...
एवा संत छे प्रबोधजी…
जेनां श्वासे श्वासमां श्री हरि, जेनी द्रष्टिमां द्रष्टा छे श्री हरि...
एवा संत छे प्रबोधजी…
एवा दासनां दास क्यां मळे, जेनां जामीन छे स्वयं श्री हरि…
एवा संत छे प्रबोधजी…
[Instrumental]
संत ते स्वयं हरि…संत ते स्वयं हरि…संत ते स्वयं हरि…
संत ते स्वयं हरि…संत ते स्वयं हरि…संत ते स्वयं हरि…
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