Jai Vishal Garhdesi | Garhwali Kavita | Kaphal | Himalayan Folk Festival
Автор: Pandavaas
Загружено: 2026-01-17
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जय विशाल गढ़देसी
जय विशाल गढ़देसी समकालीन कवि हैं, जिनकी कविता गढ़वाल हिमालय की मिट्टी, भाषा और जीवन-बोध से गहराई से जुड़ी हुई है। उनकी रचनाओं में पहाड़ का दैनिक जीवन, स्मृतियाँ, पलायन, पहचान और समाज की संवेदनशील सच्चाइयाँ सहज रूप से अभिव्यक्त होती हैं।
उनकी कविता लोक चेतना और आधुनिक दृष्टि के बीच सेतु का कार्य करती है। हास्य और व्यंग्य के माध्यम से वे गंभीर बातों को भी अत्यंत सहज और प्रभावशाली ढंग से कह जाते हैं। उनकी प्रस्तुति में कॉमिक टाइमिंग, चुटीलापन और विनोद-बोध कविता को और अधिक जीवंत बना देता है।
सरल भाषा में कही गई उनकी पंक्तियाँ गहरे अर्थ रचती हैं और श्रोता को भीतर तक छू जाती हैं। जय विधाल गढ़देसी की कविताएँ केवल शब्द नहीं, बल्कि समय, समाज और संस्कृति का सजीव दस्तावेज़ हैं।
यह प्रस्तुति उनके काव्य-स्वर, विचार और दृष्टिकोण को सामने लाने का एक प्रयास है — ताकि गढ़वाली साहित्य और हिमालयी संवेदना को व्यापक मंच मिल सके।
गढ़वलि़ कविता
गढ़वलि़ कविता पांडवाज़ द्वारा प्रस्तुत एक काव्य श्रृंखला है, जिसमें गढ़वाल के विभिन्न कवियों की पारंपरिक और समकालीन रचनाएँ सामने आती हैं। इस श्रृंखला के प्रत्येक एपिसोड में अलग-अलग कवि अपनी कविता के माध्यम से पहाड़ का जीवन, भाषा, स्मृति, संघर्ष, प्रेम, पलायन और सामाजिक चेतना को अभिव्यक्त करते हैं।
काफल फ़ेस्टिवल
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग ज़िले में स्थित सारी गाँव (देवरियाताल के निकट) में आयोजित होने वाला एक वार्षिक सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय उत्सव है। यह उत्सव पहाड़ों में बसंत ऋतु के आगमन और जंगलों में मिलने वाले मौसमी फल काफल के नाम पर मनाया जाता है।
हिमालयन फ़ोक फ़ेस्टिवल
हिमालयन फ़ोक फ़ेस्टिवल एक अम्ब्रेला फ़ेस्टिवल है, जिसके अंतर्गत हिमालयी क्षेत्र के विभिन्न लोक-संस्कृति आधारित उत्सव आयोजित किए जाते हैं। इस फ़ेस्टिवल के भीतर काफल फ़ेस्टिवल और धवाड़ी (DHAVĀḌI) जैसे उत्सव अलग-अलग स्थानों पर, अपनी स्थानीय पहचान और परंपराओं के साथ संपन्न होते हैं।
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