संजीवनी का चमत्कार जब हनुमान पर्वत उठा लाए! भगवान विष्णु के 24 अवतार Part 21
Автор: Shlok Sarita
Загружено: 2026-01-22
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संजीवनी का चमत्कार: जब हनुमान पर्वत उठा लाए!-भगवान विष्णु के 24 अवतार-Part 21
**“मित्रों…
कल्पना कीजिए—
एक ओर समय समाप्त हो रहा हो,
दूसरी ओर लक्ष्मण मृत्यु-सीमा पर हों…
और हनुमान
रात के अंधेरे में
पूरा पर्वत उठाकर लौट रहे हों!
आज की कथा—
असंभव को संभव करने की है…”**
नमस्कार मित्रों,
मैं हूँ छोटा वाणी—
और आप सुन रहे हैं Shlok Sarita,
जहाँ हर श्लोक… एक कहानी बन जाता है।
पिछले भाग में
आपने सुना—
मेघनाद के शक्ति-बाण से
लक्ष्मण अचेत हो गए,
और हनुमान
संजीवनी बूटी की खोज में निकल पड़े।
आज की कथा—
उस महान क्षण की है
जब हनुमान
देवों और असुरों से टकराकर भी
प्रभु के लिए पर्वत उठा लाए।
🕉️ संस्कृत श्लोक
“यत्र यत्र धृतो रामो
हनूमांश्च महाबलः।
तत्र रक्षोविनाशोऽस्ति
तत्र दौर्वल्यभंजनम्॥”
अर्थ:
जहाँ श्रीराम और महाबली हनुमान हों,
वहाँ राक्षसों का विनाश निश्चित होता है
और हर दुर्बलता टूट जाती है।
हनुमान का द्रोण पर्वत की ओर प्रस्थान
हनुमान
महावेग से उड़ रहे थे—
नक्षत्रों को पीछे छोड़ते हुए।
उन्होंने कहा—
“लक्ष्मण मेरे भाई हैं…
उन्हें कुछ नहीं होने दूँगा!”
समय कम था,
रात्रि गहराती जा रही थी।
अचानक
एक विशाल पर्वत दिखाई दिया—
जो दिव्य प्रकाश से चमक रहा था।
यह था—
✨ द्रोण पर्वत
जहाँ संजीवनी सहित
अनेक जीवनदायिनी औषधियाँ थीं।
हनुमान और द्रोण पर्वत का संवाद (कथा के रूप में)
हनुमान पर्वत पर उतरे।
उन्होंने कहा—
“हे पर्वतराज,
लक्ष्मण के जीवन की रक्षा हेतु
संजीवनी बूटी की आवश्यकता है।”
द्रोण पर्वत
धीमे से बोला—
“वत्स,
सभी औषधियाँ मेरे भीतर हैं—
पर पहचानने के लिए
ज्ञान की दृष्टि चाहिए।”
हनुमान ने
बूटी खोजने की कोशिश की—
पर रात के अंधेरे और
चमकते वनस्पतियों के बीच
सब एक समान दिखाई दे रहे थे।
वे व्याकुल हो उठे—
“समय जा रहा है…
कौन-सी बूटी संजीवनी है?”
अचानक उन्होंने समाधान सोचा—
“जब एक-एक पत्ती नहीं पहचान पा रहा…
तो पूरा पर्वत ही लेकर चलता हूँ!”
और वे
द्रोण पर्वत को दोनों हाथों से उठाते हैं!
धरती काँप उठती है।
देवताओं में आश्चर्य फैल जाता है।
असुरों द्वारा बाधा
लौटते समय
असुरों ने मार्ग रोका—
क्योंकि उन्हें पता था
लक्ष्मण का जीवित रहना
मेघनाद की शक्ति को चुनौती देगा।
असुर बोले—
“वानर!
तू यह पर्वत नहीं ले जा सकेगा!”
हनुमान गरजे—
“मैं राम का दूत हूँ।
मेरे मार्ग में
कोई रुकावट नहीं टिक सकती!”
उन्होंने
एक गर्जना की—
और मार्ग साफ़ हो गया।
पर्वत लेकर हनुमान का लौटना
आकाश में
पर्वत सहित उड़ते
हनुमान का अद्भुत दृश्य—
संसार ने पहली बार देखा।
नीचे
वानर सेना ने कहा—
“देखो!
प्रकाश का एक पर्वत
हमारी ओर आ रहा है!”
राम ने देखा—
आँखें नम हो उठीं।
“हनुमान…
तुम मेरे जीवन के रक्षक हो।”
हनुमान
पर्वत को लेकर उतरे
और कहा—
“जाम्बवंतजी,
शीघ्र निर्णय करें—
कौन-सी औषधि देनी है!”
जाम्बवंत ने
संजीवनी बूटी को पहचानकर
लक्ष्मण पर रखा।
संजीवनी का चमत्कार
कुछ ही क्षणों में
लक्ष्मण के शरीर में
हल्की हरियाली चमकी।
श्वास चली…
फिर मजबूत हुई…
और अचानक
लक्ष्मण उठकर बैठ गए!
पूरी सेना
आनंद से चिल्ला उठी—
“जय श्रीराम!
जय हनुमान!”
राम
लक्ष्मण को गले लगाकर बोले—
“मेरे प्राण…
तुम लौट आए!”
लक्ष्मण ने कहा—
“भैया,
यह सब
हनुमान की भक्ति का चमत्कार है।”
हनुमान झुक गए—
“प्रभो,
मैं तो आपका सेवक हूँ।”
लक्ष्मण का संकल्प
लक्ष्मण उठकर बोले—
“अब यह युद्ध
एक ऋण है
जो मैं इस संसार के धर्म के लिए चुकाऊँगा!”
उनकी आँखों में
अग्नि का संकल्प चमक रहा था।
राम ने कहा—
“आज युद्ध बदल चुका है।
अब जीत निश्चित है।”
🙏 धन्यवाद मित्रों,
आज आपने सुना—
• हनुमान का द्रोण पर्वत की ओर प्रस्थान
• संजीवनी न पहचान पाने पर पर्वत उठाना
• असुरों से टकराना
• और अंत में—
लक्ष्मण का जीवन लौट आना
अब बताइए—
हनुमान की कौन-सी शक्ति
आपको सबसे अद्भुत लगी?
अपने विचार कमेंट में लिखें।
और अगर यह अध्याय आपके हृदय को छू गया—
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🌸 अगले भाग में सुनेंगे—
मेघनाद–लक्ष्मण का अंतिम युद्ध और मेघनाद का अंत (Part 22)
फिर मिलेंगे मित्रों—
तब तक के लिए राम राम।
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