राजस्थान के आभूषण || आभूषण ||for all exam rajasthan 🎯 by D.M SIR
Автор: D.MClasses
Загружено: 2026-02-13
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🌺 राजस्थान के पारंपरिक आभूषण 🌺
राजस्थान के आभूषण केवल सजावट का साधन नहीं, बल्कि यहाँ की समृद्ध संस्कृति, शौर्य और परंपरा का प्रतीक हैं। मरुभूमि की धरती पर जन्मे ये आभूषण रंग-बिरंगी वेशभूषा के साथ मिलकर राजस्थानी नारी की सुंदरता को और भी आकर्षक बना देते हैं।
राजस्थान में प्राचीन काल से ही सोना, चाँदी, हीरा, कुंदन, मीनाकारी और थेवा कला से बने आभूषणों का विशेष महत्व रहा है। यहाँ के आभूषणों में बारीक नक्काशी और पारंपरिक डिज़ाइन देखने को मिलते हैं, जो शाही वैभव की झलक देते हैं।
महिलाएँ सिर से लेकर पाँव तक विभिन्न प्रकार के गहने पहनती हैं। माथे पर बोरला (माथा टीका), गले में आड़ (Aad) और हँसली, हाथों में बाजूबंद और कंगन, नाक में नथ, तथा पैरों में पायल और बिछिया प्रमुख आभूषण हैं। विशेष अवसरों जैसे विवाह और त्योहारों पर महिलाएँ भारी कुंदन और मीनाकारी के गहने पहनती हैं।
राजस्थान के आभूषणों में केवल सौंदर्य ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान भी छिपी होती है। अलग-अलग क्षेत्रों जैसे जयपुर, जोधपुर और बीकानेर में आभूषणों की शैली और डिज़ाइन में भी भिन्नता देखने को मिलती है।
इस प्रकार राजस्थान के आभूषण कला, परंपरा और शाही विरासत का अद्भुत संगम हैं, जो आज भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए हैं। ✨💍
हुए हैं।
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