ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका (कक्षा 05) ईश्वरविषयः ~आचार्य प्रियेश
Автор: VED PRACHAR SAMITI
Загружено: 2021-10-21
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#वेद, #veda, #darshanyogdham ब्रह्मानन्तमनादिविश्वकृदजं सत्यं परं शाश्वतं,
विद्या यस्य सनातनी निगमभृद् वैधर्म्यविध्वंसिनी। वेदाख्या विमला हिता हि जगते नृभ्यः सुभाग्यप्रदा, तन्नत्वा निगमार्थभाष्यमतिना भाष्यं तु तन्तन्यते ॥ १ ॥
(ब्रह्मानन्त०) जो ब्रह्म अनन्त आदि विशेषणों से युक्त है, जिसकी वेद विद्या सनातन है, उस को अत्यन्त प्रेम भक्ति से मैं नमस्कार करके इस वेदभाष्य के बनाने का आरम्भ करता हूं ॥१॥
कालरामाङ्कचन्द्रेऽब्वे भाद्रमासे सिते दले । प्रतिपद्यादित्यवारे भाष्यारम्भः कृतो मया ॥२॥
(कालरा०) विक्रम के संवत् १९३३ भाद्रमास के शुक्लपक्ष की प्रतिपदा, रविवार दिन इस वेदभाष्य का आरम्भ मैंने किया है ॥२॥
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