अब कोहरे में नही थमेगी ट्रेनों की रफ्तार, रेलवे ने लगाया फॉग सेफ्टी डिवाइस सिग्नल सिस्टम F S D
Автор: Rakesh Sharma Bikaner
Загружено: 2026-01-20
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बीकानेर मंडल की सभी ट्रेनें फोग डिवाइस के साथ संचालित की जा रही हैं
फॉग सेफ्टी डिवाइस = GPS आधारित चेतावनी सिस्टम
जो कोहरे में लोको पायलट को आगे आने वाले सिग्नल और खतरे के बारे में पहले ही सचेत कर देता है।
उत्तर-पश्चिम रेलवे के बीकानेर मंडल में सर्दियों के दौरान पड़ने वाले घने कोहरे से रेल संचालन को सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। भारतीय रेलवे ने लोको में अत्याधुनिक फॉग सेफ्टी डिवाइस स्थापित किया है।
इस उपकरण का उद्देश्य कोहरे की स्थिति में लोको पायलटों की दृश्यता बढ़ाना और ट्रेनों के सुरक्षित परिचालन को सुनिश्चित करना है। कोहरे के समय सिग्नल, ट्रैक और आगे की स्थिति स्पष्ट न दिख पाने के कारण दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। फॉग सेफ्टी डिवाइस ऐसे हालात में अतिरिक्त सुरक्षा परत का काम करता है।
फॉग सेफ्टी डिवाइस की प्रमुख विशेषताएँ
कम दृश्यता में सहायता: घने कोहरे में लोको पायलट को आवश्यक चेतावनी और संकेत प्रदान करता है।
सुरक्षा में वृद्धि: सिग्नल मिस होने और मानवीय त्रुटि की संभावना को कम करता है।
विश्वसनीय संचालन: कोहरे के दौरान भी ट्रेनों का संचालन अधिक नियंत्रित और सुरक्षित रहता है।
लोको पायलटों के लिए सहायक: लंबे रूट और रात्रिकालीन ड्यूटी में अतिरिक्त भरोसा देता है।
बीकानेर क्षेत्र में इसका महत्व
बीकानेर और आसपास के रेगिस्तानी क्षेत्रों में सर्दियों में अक्सर घना कोहरा छा जाता है, जिससे रेल यातायात प्रभावित होता है। ऐसे में लोको शेड स्तर पर इस तरह की तकनीक का होना, न केवल मालगाड़ियों बल्कि यात्री ट्रेनों की समयपालन और सुरक्षा दोनों के लिए बेहद उपयोगी सिद्ध होगा।
रेलवे प्रशासन के अनुसार भविष्य में इस प्रकार की सुरक्षा प्रणालियों को अन्य संवेदनशील लोकेशन पर भी चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, ताकि “सुरक्षा प्रथम” के सिद्धांत को और अधिक मजबूत किया जा सके।
यह पहल भारतीय रेलवे के तकनीकी आधुनिकीकरण और यात्रियों की सुरक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
फॉग सेफ्टी डिवाइस (Fog Safety Device FSD) क्या होता है और कैसे काम करता है
फॉग सेफ्टी डिवाइस भारतीय रेलवे द्वारा विकसित एक लोको कैब में लगाया जाने वाला इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा उपकरण है, जो घने कोहरे, धुंध और कम दृश्यता की स्थिति में लोको पायलट को सिग्नल और महत्वपूर्ण लोकेशन की अग्रिम चेतावनी देता है।
1. फॉग सेफ्टी डिवाइस कैसा होता है
आकार में छोटा इलेक्ट्रॉनिक बॉक्स
लोको के कैब डेस्क पर लगा डिस्प्ले/इंडिकेटर यूनिट
अंदर GPS रिसीवर, माइक्रो-कंट्रोलर और मेमोरी चिप
स्पीकर/बज़र और LED लाइट
लोको की बैटरी से पावर सप्लाई
सरल शब्दों में, यह एक GPS आधारित चेतावनी यंत्र होता है।
2. फॉग सेफ्टी डिवाइस के मुख्य भाग
GPS एंटीना – लोको की सटीक लोकेशन बताता है
डाटाबेस/मेमोरी – रूट के सिग्नल, स्टेशन, LC गेट, स्पीड ब्रेकर, न्यूट्रल सेक्शन की जानकारी
डिस्प्ले यूनिट – आगे आने वाली जानकारी स्क्रीन पर दिखाता है
ऑडियो अलार्म – चेतावनी देने के लिए आवाज
कंट्रोल बटन – रीसेट और फंक्शन चयन के लिए
3. यह कैसे काम करता है (कार्य प्रणाली)
चरण 1: लोको की लोकेशन पहचान
GPS के माध्यम से डिवाइस यह पहचान लेता है कि ट्रेन किस सेक्शन में चल रही है।
चरण 2: रूट डाटाबेस से मिलान
डिवाइस अपनी मेमोरी में सेव सिग्नल, स्टेशन, गेट और स्पीड प्रतिबंध से लोको की लोकेशन का मिलान करता है।
चरण 3: अग्रिम चेतावनी
जैसे ही ट्रेन किसी महत्वपूर्ण बिंदु (जैसे होम सिग्नल, आउटर, LC गेट) से लगभग
500 मीटर – 2 किलोमीटर पहले पहुँचती है:
बज़र बजता है
डिस्प्ले पर संदेश आता है, जैसे:
“Home Signal Ahead”
“Caution – LC Gate”
“Station Approaching”
चरण 4: लोको पायलट की पुष्टि
लोको पायलट अलार्म सुनकर सतर्क हो जाता है
आवश्यकतानुसार स्पीड कम करता है या ब्रेक लगाता है
बटन दबाकर अलार्म को ACK करता है
4. कोहरे में यह कैसे मदद करता है
जब सिग्नल आंखों से नहीं दिखते
रात और घने कोहरे में सिग्नल मिस होने से बचाव
मानवीय त्रुटि में कमी
ब्रेकिंग के लिए अतिरिक्त समय मिलता है
5. फॉग सेफ्टी डिवाइस की सीमाएँ
यह ऑटोमैटिक ब्रेक नहीं लगाता
सिग्नल की वास्तविक स्थिति (Red/Green) नहीं बताता
GPS सिग्नल कमजोर होने पर सटीकता कम हो सकती है
इसलिए इसे Kavach/TPWS का विकल्प नहीं, बल्कि पूरक सुरक्षा उपकरण माना जाता है।
6. कहां-कहां उपयोग होता है
उत्तर भारत के कोहरा प्रभावित सेक्शन
बीकानेर, दिल्ली, लखनऊ, मुरादाबाद जैसे मंडल
मुख्यतः सर्दियों (दिसंबर–फरवरी) में
संक्षेप में
फॉग सेफ्टी डिवाइस = GPS आधारित चेतावनी सिस्टम
जो कोहरे में लोको पायलट को आगे आने वाले सिग्नल और खतरे के बारे में पहले ही सचेत कर देता है।
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