“आत्मौपम्य दृष्टि: समभाव ही परम योग है” || Bhagavad Gita Chapter 6.32 | ध्यान योग
Автор: School Of Gita - Live
Загружено: 2026-02-21
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श्रीमद्भगवद्गीता श्लोक : 6.32
🎤 आज के वक्ता: 🌿 *श्रीमन् कीर्ति नारायण प्रभु **
आत्मौपम्य दृष्टि: समभाव ही परम योग है
1️⃣ आत्मौपम्य दृष्टि क्या है?
2️⃣ समदर्शन – समान दृष्टि का अभ्यास
3️⃣ सुख-दुःख में समानता
4️⃣ व्यवहार में इस श्लोक का प्रयोग
Повторяем попытку...
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