सतना के बिड़ला कॉलोनी की बस्ती जहां डीएसपी संतोष पटेल को खून देने वाले सफाई कर्मी की बेटियां मिलीं।
Автор: Santosh Patel DSP
Загружено: 2025-12-30
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बंदे में एक दोष न हो, बंदा एहसान फरामोश न हो... किसी के एहसान को भूल जाना जिंदा रहते सबसे बड़ा पाप है। यह जज्बात हैं मध्य प्रदेश पुलिस के चर्चित डीएसपी संतोष पटेल के, जो 26 साल बाद उस फरिश्ते को ढूंढने सतना पहुंचे थे, जिसने बचपन में अपना खून देकर उनकी जान बचाई थी। वह फरिश्ता कोई बड़ा डॉक्टर या अमीर आदमी नहीं, बल्कि एक सफाईकर्मी 'संतु मास्टर' थे। सतना पहुंचकर जब डीएसपी को पता चला कि संतु मास्टर अब इस दुनिया में नहीं हैं, तो उनकी आंखें नम हो गईं। उन्होंने झुग्गी बस्ती में जाकर उनकी बेटियों के पैर छुए और छोटी बेटी की शादी कराने का संकल्प लिया।
1999 में जब शरीर में खून की जगह बन गया था पानी
डीएसपी संतोष पटेल ने वो पुराना किस्सा साझा किया, जब वे 8-9 साल के थे। सन 1999 में उन्हें एक गंभीर बीमारी ने घेर लिया था। शरीर का खून पानी बनकर मवाद में बदल गया था। दादाजी और पिताजी ने 6 महीने झाड़-फूंक में गंवा दिए। हालत बिगड़ी तो पन्ना जिला अस्पताल और फिर सतना के एक निजी अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने कहा ऑपरेशन करना होगा, खून की सख्त जरूरत है। उस दौर में रक्तदान को लेकर लोगों में डर था, कोई डोनर नहीं मिल रहा था। #dspsantoshpatel #dsp
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