पोकरण के किले का इतिहास भाग 2 ...pokaran ka kila ,Jaisalmer ....जिसे मात्र 1 लाख रुपए में बेच दिया !
Автор: वीर भूमि राजस्थान
Загружено: 2026-01-04
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Описание:
पोकरण का किला (बालागढ़) 14वीं-16वीं सदी में बना एक ऐतिहासिक किला है, जिसे लाल बलुआ पत्थर से बनाया गया है और यह राठौड़ वंश के शासनकाल से जुड़ा है; यह किला अपने अद्भुत स्थापत्य, प्राचीन अस्त्र-शस्त्रों और भारत के परमाणु परीक्षणों के कारण प्रसिद्ध है, जो इसे सामरिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाता है. वर्तमान में, यह एक विरासत होटल के रूप में संचालित होता है.
निर्माण और शासक (Construction & Rulers):
कुछ स्रोतों के अनुसार, इसका निर्माण 14वीं शताब्दी में हुआ, जबकि अन्य बताते हैं कि 1550 ईस्वी में राव मालदेव राठौड़ ने इसका पुनर्निर्माण कराया.
यह किला कभी चाम्पावत राठौड़ राजपूतों के अधीन था और मारवाड़ के इतिहास से जुड़ा है.
स्थापत्य और विशेषताएँ (Architecture & Features):
यह किला लाल बलुआ पत्थर से निर्मित है और अपनी मज़बूती के लिए जाना जाता है.
इसमें हवा महल, फूल महल, मंगल निवास जैसे कई हिस्से हैं.
किले में 600 साल पुराने कूलर, तोपें, तलवारें, पुराने बर्तन, पालकी और अस्त्र-शस्त्र रखे हैं.
इसमें देवी-देवताओं के मंदिर और खूबसूरत अस्तबल भी हैं.
किले के दरवाज़ों पर हाथियों और घोड़ों से बचाने के लिए अंकुश लगे हैं, और सैनिकों के छिपने व हमला करने के लिए झरोखे बने हैं.
ऐतिहासिक महत्व (Historical Significance):
परमाणु परीक्षण स्थल: पोकरण 1974 और 1998 में भारत के ऐतिहासिक परमाणु परीक्षणों (ऑपरेशन स्माइलिंग बुद्धा और ऑपरेशन शक्ति) का स्थल रहा है, जिसने इसे विश्व मानचित्र पर ला दिया.
सामरिक स्थिति: जोधपुर और जैसलमेर की सीमा पर होने के कारण इसका सामरिक महत्व रहा है.
वर्तमान स्थिति (Current Status):
पोकरण किला अब एक हेरिटेज होटल में बदल दिया गया है और पोकरण परिवार द्वारा प्रबंधित किया जाता है, जो पर्यटकों को राजस्थानी संस्कृति और इतिहास का अनुभव कराता है.
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