जब तू ही नहीं सुनता है | JAB TU HI NAHI SUNTA HAI
Автор: RAMCHANDRA GOYAL BHAJAN
Загружено: 2022-04-07
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जब तू ही नहिं सुनता है, फिर कौन सुनेगा मेरी।
प्रभु सुनियो विनती मेरी।।टेर।।
मुझे आस एक है तेरी, मैं शरण पड़ा प्रभु तेरी।
मैं हूँ जैसा भी हूँ भगवान, अब लाज बचाना मेरी।।१।।
तूने गज की सुनी पुकारा, एक पल में संकट टारा।
कर देना माफ अवगुन मेरे प्रभु अब मत करियो देरी ।।२।।
नरसी की सुनी पुकारा, बन साँवल सेठ सिधारा ।
रख लीनि लाज करूणा के धाम, अब ऐसे हि रखियो मेरी ।।३।।
द्रोपदी की सुनी पुकारा, कर दिया चीर भंडारा ।
करते हो कृपा नित भक्तन पे, अब बारी है प्रभु मेरी ।।४।।
श्री राम नाम चित धारा, प्रभु हृदय करो उजियारा ।
बन खेवैय्या प्रभु पार लगाना, नाव भंवर बिच घेरी ।।५।।
रामचंद्र जी गोयल के भजन- जब तू ही नहीं सुनता है
आशा है कि ये आपको पसंद आएगा।
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