Bhagavad Gita: सुख–दुःख और लाभ–हानि से ऊपर कैसे उठें? | Bhagwat Geeta Quotes
Автор: Bhagavad Gita Quotes : Daily New Story
Загружено: 2025-09-01
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भगवद गीता अध्याय 2, श्लोक 45 में श्रीकृष्ण अर्जुन को जीवन का महान रहस्य बताते हैं—
🌿 श्लोक:
"त्रैगुण्यविषया वेदा निस्त्रैगुण्यो भव अर्जुन।
निर्द्वन्द्वो नित्यसत्त्वस्थो निर्योगक्षेम आत्मवान्॥"
👉 भावार्थ:
हे अर्जुन! वेदों में मुख्यतः तीन गुणों — सत्त्व, रज और तम — से जुड़े विषय बताए गए हैं।
लेकिन तू उन गुणों से ऊपर उठ, सुख–दुःख और लाभ–हानि जैसे द्वन्द्वों से मुक्त रह।
नित्य सत्व में स्थित होकर, पाने की चिंता और खोने के भय से परे, आत्मवान बन।
इस श्लोक से हम सीखते हैं कि सच्चा योगी वही है जो परिस्थितियों से प्रभावित नहीं होता और आत्मज्ञान में स्थिर रहता है।
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