अलंकार/ हिंदी व्याकरण/ अलंकार के प्रकार -3
Автор: Lakshay acedamy
Загружено: 2026-02-03
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छेकानुप्रास (Chhekanupras): जहाँ एक या अनेक वर्णों की आवृत्ति एक ही क्रम में केवल एक बार हो (जैसे: रीझि रीझि रहसि रहसि)।
वृत्यानुप्रास (Vrityanupras): जहाँ एक या अनेक वर्णों की आवृत्ति बार-बार हो (जैसे: चामर-सी, चन्दन-सी)।
लाटानुप्रास (Laatanupras): जहाँ एक ही शब्द या वाक्यांश की आवृत्ति हो, लेकिन अर्थ में भिन्नता हो।
अन्त्यानुप्रास (Antyanupras): जहाँ पदों के अंत में समान स्वर या व्यंजन आएँ (जैसे: लगा दी किसने आकर आग / कहाँ था तू संशय के नाग)।
श्रुत्यानुप्रास (Shrutyanupras): जहाँ मुख के एक ही उच्चारण स्थान से निकलने वाले वर्णों (जैसे तवर्ग, चवर्ग) का प्रयोग हो।
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