ओरिजिनल तबला 16 मात्र तीन ताल द्रुत लय पहली काली C#
Автор: Music School Sangeet Amrit
Загружено: 2026-02-13
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Описание:
तीनताल 16 मात्राओं का अत्यंत लोकप्रिय ताल है। इसकी विभाजन रचना 4–4–4–4 की होती है और बोल इस प्रकार हैं —
धा धिन धिन धा | धा धिन धिन धा | धा तिन तिन ता | ता धिन धिन धा
जब यही तीनताल द्रुत लय (तेज़ गति) में गाया या बजाया जाता है, तब साधक को विशेष सावधानी, संतुलन और नियमित रियाज़ की आवश्यकता होती है।
नीचे द्रुत तीनताल में अभ्यास की विस्तृत विधि दी जा रही है।
1. लय की स्पष्ट समझ
द्रुत लय का अर्थ केवल तेज़ गाना नहीं है, बल्कि सम पर सटीक पहुँचना और हर मात्रा को स्पष्ट रखना है।
अभ्यास की शुरुआत मध्यम लय से करें, फिर धीरे-धीरे गति बढ़ाएँ। सीधे बहुत तेज़ लय में जाने से स्वर और ताल दोनों बिगड़ सकते हैं।
पहले 60–80 BPM पर अभ्यास
फिर 100–120 BPM
उसके बाद द्रुत (140 या उससे अधिक)
2. तानपुरा के साथ स्वर साधना
द्रुत तीनताल का अभ्यास हमेशा तानपुरा के साथ करें। तानपुरा से सुर स्थिर रहते हैं और लय में संतुलन आता है।
सा–पा–सा या सा–म–सा पर ध्यान केंद्रित करें।
5–10 मिनट केवल सा पर स्थिर होकर शुद्ध स्वर लगाएँ।
फिर सरगम को द्रुत लय में बोलकर गाएँ।
उदाहरण:
सा रे ग म | रे ग म प | ग म प ध | म प ध नि | प ध नि सा
3. बोलों का स्पष्ट उच्चारण
तीनताल के मूल बोलों को पहले बोलकर अभ्यास करें:
धा धिन धिन धा | धा धिन धिन धा | धा तिन तिन ता | ता धिन धिन धा
हर ताली और खाली की पहचान रखें।
1 (सम), 5 (ताली), 9 (खाली), 13 (ताली) को स्पष्ट समझें।
द्रुत में अक्सर साधक खाली (9वीं मात्रा) भूल जाते हैं, इसलिए मानसिक गिनती बनाए रखें।
4. सरगम और पलटे
द्रुत तीनताल में पलटे (Pattern Practice) अत्यंत उपयोगी होते हैं।
सरल पलटा उदाहरण:
सा रे ग रे | सा रे ग रे
रे ग म ग | रे ग म ग
ग म प म | ग म प म
पहले एक आवर्तन (16 मात्रा) में पूरा करें।
फिर दो आवर्तन में गति बनाए रखें।
5. तान का अभ्यास
द्रुत लय में तान स्पष्ट और संतुलित होनी चाहिए।
सीधी तान
उलटी तान
मिश्र तान
उदाहरण:
सा रे ग म प ध नि सा – सा नि ध प म ग रे सा
ध्यान रखें कि तान सम पर समाप्त हो।
यदि तान 14 या 15वीं मात्रा पर खत्म हो रही है तो गणना सुधारें।
6. बोलतान और आकार
यदि आप खयाल गा रहे हैं, तो द्रुत बंदिश में बोलतान का अभ्यास करें।
शब्दों को स्पष्ट रखें।
लय के साथ तालमेल बनाए रखें।
आकार (आ आ आ) में तान लगाने से गले की पकड़ मजबूत होती है।
7. तबला संगति के साथ अभ्यास
द्रुत तीनताल का असली आनंद तब आता है जब तबला साथ हो।
तबला की थाप से लय की मजबूती बढ़ती है।
पहले केवल सम पकड़ें।
फिर मुखड़ा हर बार सम पर लाएँ।
तबला के साथ प्रश्न-उत्तर शैली में अभ्यास करें।
8. Layakari (लयकारी) अभ्यास
द्रुत तीनताल में दुगुन, तिगुन, चौगुन का अभ्यास करें।
एक मात्रा में दो स्वर (दुगुन)
एक मात्रा में तीन स्वर (तिगुन)
एक मात्रा में चार स्वर (चौगुन)
उदाहरण:
सा रे | ग म | प ध | नि सा (दुगुन)
9. शारीरिक और मानसिक तैयारी
द्रुत अभ्यास करते समय:
गला तनावमुक्त रखें।
सांस का नियंत्रण बनाए रखें।
प्रतिदिन 30–40 मिनट नियमित रियाज़ करें।
अचानक बहुत तेज़ अभ्यास से स्वर बैठ सकता है।
10. सम पर विशेष ध्यान
तीनताल में सम सबसे महत्वपूर्ण है।
हर तान, हर बोल, हर पलटा सम पर सटीक आना चाहिए।
अभ्यास विधि:
4 आवर्तन गाएँ
हर चौथे आवर्तन में सम पर तिहाई लगाएँ
उदाहरण तिहाई:
सा रे ग म | सा रे ग म | सा रे ग म (सम पर समाप्त)
निष्कर्ष
16 मात्राओं का द्रुत तीनताल अभ्यास साधक की लय, स्वर, और आत्मविश्वास तीनों को मजबूत करता है।
नियमित रियाज़, सही गिनती, स्पष्ट उच्चारण और सम पर सटीक पकड़ — यही सफलता की कुंजी है।
धीरे-धीरे अभ्यास करें, फिर गति बढ़ाएँ।
द्रुत लय में नियंत्रण तभी आएगा जब आप मध्यम और विलंबित लय में मजबूत होंगे।
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