सिर्फ भारत में क्यों बाइक पर महिलाएं एक साइड क्यों बैठती? Why women sit on bike face one side?
Автор: Knowledge Saagar
Загружено: 2025-10-03
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दोस्तों हमारे यूट्यूब चैनल पर आपका स्वागत है तो आज हम जानेंगे कि अक्सर महिलाएं एक साइड पैर करके बाइक पर क्यों बैठती है?
वैसे तो इसका कोई वैज्ञानिक कारण नहीं है बट ३- ४ सामाजिक कारण हो सकता हैं यानी है।
1. साड़ी और सलवार-कुर्ता पहनावा
पहले से ही भारतीय महिलाओं का पारंपरिक पहनावा साड़ी या सलवार-कुर्ता रहा है। ऐसे कपड़ों में पैरों को दोनों तरफ रखकर (men-style) बैठना मुश्किल होता है और कपड़े फँसने का डर भी रहता है। इसलिए सुरक्षित और सुविधाजनक तरीका "एक तरफ पैर करके बैठना" बना।
2. सुरक्षा और संतुलन
पहले की बाइक्स और स्कूटर में "लेडीज़ सीट" यानी साइड फुटरेस्ट दी जाती थी। ताकि महिलाएं आराम से बैठ सकें और कपड़े भी न फँसें।
3. संस्कृति और मर्यादा का पहलू
पुराने समय में औरतों के लिए "दोनों पैर फैलाकर" बैठना सामाजिक रूप से उचित नहीं माना जाता था। इस कारण यह तरीका परंपरा में आ गया।
4. व्यावहारिक कारण
बच्चों को गोद में लेकर बैठना आसान होता है।
बाज़ार से सामान लेकर लौटते समय एक तरफ बैठने से संभालना आसान होता है।
👉 हालांकि आजकल जींस, ट्राउज़र पहनने वाली महिलाएं अक्सर दोनों पैरों से बैठकर भी सफर करती हैं। लेकिन परंपरा और कपड़ों की वजह से side-saddle बैठने की आदत अभी भी बहुत आम है।
ज़ेनिथ इरफान (zenithirfan) एक इंस्टाग्राम यूजर और कंटेंट क्रिएटर हैं जिन्हें 1 लाख से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं. हाल ही में उन्होंने एक वीडियो पोस्ट कर के बताया कि आखिर भारतीय औरतें एक तरफ पैर कर के क्यों बैठती हैं?
आपने सालों पहले से देखा होगा कि जब आपकी मां, दादी, चाची या परिवार की कोई अन्य महिला मोटरसाइकिल पर पीछे बैठती है, तो हमेशा पैरों को एक तरफ कर के ही बैठती है. यही चलन आगे भी आता गया और उनकी अगली पीढ़ी यानी 1980 यान 1990 के दौर में पैदा होने वाली औरतें भी इसी अंदाज में बैठती हैं. पर क्या आपने सोचा है कि आखिर ऐसा क्यों है? पुरुष तो यूं नहीं बैठते, फिर महिलाएं ही क्यों अपनी जान को जोखिम में डालकर यूं बैठती हैं? इसके पीछे कोई वैज्ञानिक कारण नहीं है, बल्कि सैकड़ों साल पुरानी रूढ़ीवादी सोच है, जिसके चलते ऐसा होता है. इस बारे में शायद बहुत से लोगों को पता भी नहीं होगा.
बाइक पर क्यों एक तरफ पैर कर के बैठती हैं महिलाएं?
यूं तो मगर महिलाओं का ऐसे बैठना भारत में भी बेहद आम है. वो कहती हैं कि इस तरह बैठना भारत पाकिस्तान का कल्चर नहीं है, बल्कि ये ब्रिटिश कल्चर की वजह से था. ज़ेनिथ के मुताबिक ये ट्रेंड 14वीं-15वीं सदी में शुरू हुआ. प्रिंसेस एन ऑफ बोहेमिया अपने घोड़े पर एक तरफ पैर कर के बैठी थीं और इसी तरह उन्होंने पूरे यूरोप को पार किया था जो करीब 1000 मील (1600 किलोमीटर) का सफर था. उन दिनों में औरतों का आदमियों की तरह दोनों तरफ पैर कर बैठना बेहया और बेशर्मी वाली बात माना जाता था. ज़ेनिथ ने कहा कि ये हमारे साउथ एशियन कल्चर का हिस्सा नहीं था. पाकिस्तानी होते हुए उन्होंने भारत की वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई का उदाहरण देते हुए कहा कि वो सबसे बहादुर महिला योद्धा थीं जिन्होंने घोड़े पर दोनों तरफ पैर कर के बैठकर कई युद्ध लड़े थे. जब भारत में ब्रिटिश शासन आया, तो उनका कल्चर हमने अपना लिया और बाइक आने के बाद महिलाएं उसपर एक तरफ पैर कर के बैठने लगीं.
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