योग : प्राचीन विज्ञान और कला | Indian_Civilization | Yoga: Ancient Science & Arts
Автор: Vishuddhi Films
Загружено: 2021-03-26
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योग, विश्व को भारत की एक अद्वितीय देन है। इस श्रंखला में आप देखेंगे कि योग प्राचीन भारतीयों द्वारा ज्ञान अर्जित करने में कैसे सहायक हुआ । आज विश्व भर में हठयोग का बहुत प्रचार हुआ है। लेकिन यह मूल योग से कैसे भिन्न है? प्राचीन भारतीयों ने योग की मदद से विज्ञान और कलाओं को कैसे विकसित किया था? योग आचार्य, बी के एस अयंगर बताते हैं कि प्राचीन भारतीयों को हर कर्मकांड के पहले योग करना अनिवार्य था। फिबोनाची नंबर का पहला आविष्कारक कौन है ? स्वर्णिम अनुपात किसे कहते हैं ? भारतीयों ने इसका उपयोग शिल्प, मंदिर निर्माण, कला और विद्या में कैसे किया? क्या वेदो को सुरक्षित रखने का रहस्य इसमें छुपा है? क्या पाइथागोरस ने अपनी थ्योरम भारतीयों से सीखी। क्या आधुनिक नाक की शल्य चिकित्सा वैसी ही है जैसी प्राचीन हिंदू करते थे ? क्या आधुनिक समय में आयुर्वेद का स्वरूप बदल गया है ? वेदों में अन्न को ब्रह्म कहा गया है, जाने कैसे।
अगला अध्याय ---
अध्याय ३, योग : भारतीय ज्ञान और कला का आधार/ Yoga - Foundation of Indian Knowledge & Arts
• 3/24 | योग: काल और महाकाल | Indian_Civiliz...
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संक्षिप्त विवरण ---
वृत्तचित्रों की शृंखला : भारतीय सभ्यता : सातत्य और परिवर्तन
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इस वृत्तचित्र का उदेश्य भारत के ज्ञान - विज्ञान, कलाओं और जीवन के वैज्ञानिक व आध्यात्मिक महत्व को प्रामाणिक रूप से प्रस्तुत करना है। महारास की भारतीय संस्कृति की यह भव्य प्रस्तुति केवल मंत्रमुग्ध नहीं करती । भविष्य के लिए नई दृष्टि देती है। भारतीयों की प्रकृति श्रद्धा, मानव और पृथ्वी दोनों को उपभोक्तावाद से बचा सकती है। प्रकृति की विविधता और उसकी आन्तरिक एकता, मानव की भी वास्तविकता है। विविधता का उत्सव मनाती महारास की भारतीय संस्कृति हज़ारों वषों तक जीवन को सत्य,समृद्धि और सौन्दर्य से तृप्त करती रही है। यह फिल्म श्रृंखला इसे भारतीय दर्शन, प्राचीन स्थापत्य व लोक कलाओं से दर्शाती है।
पश्चिम के आक्रमणकारी भारत की देव विविधता और कलाओं के प्रति घृणा से भरे हुए थे। उनके आक्रमण युद्घ नहीं थे क्रूर हत्याकांड थे। उन्होंने विश्वविद्यालयों को जलाकर भारत के ज्ञान - विज्ञान की निरन्तरता को अवरुद्ध कर दिया।
भारत का मध्यकालीन विनाश और उपनिवेशिक शोषण मानवता की बहुत बड़ी हानि है। भारतीयों के स्वस्थ जीवन का आधार उनकी समग्र दृष्टी रही है।
अखण्ड दृष्टि का पुननिर्माण कठिन है। लेकिन अपनी सभ्यता के पुननिर्माण की अदम्य इच्छा भारतीयों के मन में आज भी है। भारतीय आज भी प्राचीन सभ्यता के उच्च स्वरुप को बनाए रखना चाहते हैं। इस फिल्म का निर्माण उसी इच्छा का परिणाम है।
विशेष :
१० वर्षों का अनुसंधान और फिल्मांकन
१४१ भारतीय स्थल, संग्रहालय और पुस्तकालय
५२ विदेशी स्थल और संग्रहालय
३० उच्चकोटि के विद्वानों का योगदान - इतिहास, दर्शन, पुरातत्व, संस्कृत, कला, मस्तिष्क विज्ञान , योग आदि क्षेत्र से।
भारत की अदभुत मूर्तिकला, नृत्य, संगीत, चित्रकला, मंदिर स्थापत्य ज्ञान और आनन्द को पैदा करने वाला है यह वृत्तचित्र।
प्रस्तुतकर्ता : श्रीमती सूरज एवं श्री वल्लभ भंशाली
शोध और निर्देशन : डॉ दीपिका कोठारी एवं रामजी ओम
विद्वान : प्रो मिनाक्षी जैन, डा. कोनराड एल्स्ट, प्रो. मक्खन लाल
निर्माता : विशुद्धि फिल्म्स एवं देश अपनाएं सहयोग फाउंडेशन
लेखन एवं फिल्मांकन: रामजी ओम
संकलन : संतोष राउत
पार्श्व संगीत : टूटन बी रॉय
website : www.vishuddhifilms.com
00:00 आधुनिक योग हठयोग है।
04:33 प्रकृति है ज्ञान और कलाओं की गुरु
05:43 फिबोनाची नम्बरों और भारतीय ज्ञान परंपरा
07:27 छन्द और वैदिक ज्ञान का संरक्षण
11:07 प्राचीन भारतियों का शरीर विज्ञान
13:15 अन्न, योग और आरोग्य
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