💖कन्हैया मेरो बेदर्दी रे… प्रेम में भीगी पुकार, विरह में डूबी पुकार 💖Rajvati Satsang✨🙏👍💬🔔
Автор: RAJVATI SATSANG
Загружено: 2025-12-22
Просмотров: 30299
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🌺 भजन का भावार्थ, व्याख्या एवं संपूर्ण सारांश 🌺
यह भजन प्रेम, विरह और आत्मसमर्पण की गहराइयों को छूता हुआ एक अत्यंत भावुक कृष्ण-भक्ति रचना है।
भक्त अपने प्रिय कन्हैया से प्रेमपूर्ण उलाहना देता है—
कि तुम तो बेदर्दी हो गए, मेरी पीड़ा, मेरी तड़प, मेरी विरह-वेदना को नहीं समझते।
यहाँ “बेदर्दी” शब्द शिकायत नहीं, बल्कि असीम प्रेम का अधिकार है।
जब प्रेम गहरा होता है, तभी ऐसी मीठी तकरार जन्म लेती है।
🌸 भजन की व्याख्या 🌸
इस भजन में भक्त की आत्मा श्रीकृष्ण से प्रश्न करती है—
जब मैं हर पल तुम्हारा नाम जपती हूँ,
जब मेरी सांस-सांस में तुम बसे हो,
तब भी तुम मेरी पुकार क्यों नहीं सुनते?
यह मीरा, राधा और हर प्रेमी भक्त की भावना को दर्शाता है,
जहाँ भगवान दूर प्रतीत होते हैं,
लेकिन उसी दूरी में प्रेम और भी प्रगाढ़ हो जाता है।
कन्हैया की “बेदर्दी” वास्तव में उनकी लीला है—
वे भक्त की परीक्षा लेते हैं,
ताकि प्रेम केवल मांग न रहे,
बल्कि पूर्ण समर्पण बन जाए।
🌼 भजन का आध्यात्मिक संदेश 🌼
✨ सच्चा प्रेम शिकायत में भी भक्ति है
✨ विरह ही प्रेम को अमर बनाता है
✨ भगवान देर करते हैं, पर अंधेर नहीं
✨ पुकार सच्ची हो तो कन्हैया अवश्य आते हैं
यह भजन हमें सिखाता है कि
ईश्वर से प्रेम करो, परिणाम की चिंता किए बिना।
🌺 संपूर्ण भजन का सारांश 🌺
👉 यह भजन प्रेम से उपजी पीड़ा का मधुर चित्रण है
👉 भक्त का मन कन्हैया के लिए तड़प रहा है
👉 विरह में भी भक्ति जीवित है
👉 अंततः यही तड़प ईश्वर से मिलन का मार्ग बनती है
🙏 Rajvati Satsang के इस भाव-विभोर कर देने वाले भजन को
अपने हृदय से सुनें, अनुभव करें और प्रेम में डूब जाएँ।
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✨🌸 जय श्री कृष्ण 🌸✨
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