ycliper

Популярное

Музыка Кино и Анимация Автомобили Животные Спорт Путешествия Игры Юмор

Интересные видео

2025 Сериалы Трейлеры Новости Как сделать Видеоуроки Diy своими руками

Топ запросов

смотреть а4 schoolboy runaway турецкий сериал смотреть мультфильмы эдисон
Скачать

Barhaj ka itihas | बरहज का इतिहास | जिला-देवरिया,उत्तर प्रदेश भारत |बरहना बाबा,राघवदास की तपोभूमि

Автор: 11 STAR

Загружено: 2021-05-09

Просмотров: 736

Описание: यह वीडियो व्यवसाय के उद्देश्य से नहीं बनाई गई है ये वीडियो पहले से ही यूट्यूब पर @salempurblog पर अपलोड है जिसे बनाया है संचिता रावत ने बस मैं इसको अपने बरहज शहर में दिखाने के लिए इसे अपने आई डी से अपलोड कर रहा |

#barhnababa #historyofbarhaj #aazadikiladai #ramprshadbismil

उत्तर प्रदेश, देवरिया ज़िले में एक छोटी-सी जगह है, बरहज. यह कस्बा कभी बहुत विपन्न नहीं रहा. अब तो यह बड़ा नगर हो गया है, और आस-पास दस-बारह किलोमीटर के दायरे में सबसे बड़ी बाज़ार इसी नगर में है, लेकिन सौ साल पहले भी यह एक मशहूर और समृद्ध कस्बा हुआ करता था. कारण, नदी के किनारे बसा हुआ होना, और ज़िले में सबसे अधिक देशी चीनी मिलों (खांड़सारी) का इस शहर में होना. एक समय इस छोटे से कस्बे में लगभग 300 कारखाने थे. आज यहाँ जो भी छोटी-बड़ी कोठियाँ दिखती हैं, वो या तो महाजनों के घर हुआ करते थे या फिर चीनी के कारखाने.

बरहज का बना हुआ सीरा नदी के रास्ते बिहार होते हुए बंगाल-ढाका तक जाता था. साल 1957 तक यहाँ पानी की जहाज़ें चलती थीं और यहाँ घाट पर एक जहाज़-बाबू की नियुक्ति रहती थी.

यहाँ के कारखानों से जो सीरा मिलों में ले जाया जाता था, वह टीन के कनस्तर में जाता था. बैलगाड़ी से उन कनस्तरों को ले जाते हुए सीरा सड़क पर चूता जाता था. कहते हैं, औरतें उन बैलगाड़ियों के पीछे-पीछे उस गिरते सीरे को रोकने के लिए चलती रहती थीं. उसी चूते हुए सीरे को बेच-बेचकर वो सोने की हँसुली पहनती थीं. आज भी किसी को यह कहते यहाँ सुना जा सकता है कि बरहज में सवा-घड़ी सोना बरसता है. यानी, वो समय, जब बैलगाड़ियाँ सड़कों पर से निकलती थीं, उस समय यहाँ सोना बरसता था.

आज भी किसी को यह कहते यहाँ सुना जा सकता है कि बरहज में सवा-घड़ी सोना बरसता है

यहाँ एक बेचू साव थे. अनन्त महाप्रभु जिनके बागीचे में आकर तपस्या करने लगे थे और सूखा बागीचा कुछ महीनों में ही हरा-भरा हो गया था. इन्हीं अनन्त महाप्रभु के शिष्य थे बाबा राघवदास, जिनको पूर्वांचल का गाँधी कहा जाता है. उन बेचू साव के यहाँ शादी पड़ी. बारातियों की संख्या का कोई अनुमान नहीं था. तय हुआ बारातियों को शरबत पिलाया जाएगा लेकिन इतनी बड़ी बारात के लिए कितना शरबत बनवाया जाए. बेचू साव के दरवाज़े पर एक कुआँ था, उसमें उन्होंने चीनी के बोरे घुलवा दिए. उस कुएँ में से महीने भर मीठा पानी आता रहा था.

जहाज़ का आना बन्द हुआ, चीनी मिलें बन्द होने लगीं, कारखाने बन्द होने लगे. जो चीनी के साहूकार थे, अब लोहे का कारोबार करने लगे. यहाँ लोहे के व्यवसाय ने भी लम्बी मार की. यहाँ बने लोहे के सामान दूर-दूर मेलों में जाते थे.

लोहे का काम भी बन्द होने के बाद, इस शहर का कोई ख़ास चरित्र नहीं रह गया. यह बस एक ‘नगरपालिका’ रह गया. पुराने इतिहास और बाबा राघवदास के नाम पर मुग्ध भर. बचा है तो बस उन साहूकारों का नाम, लोगों की बातों में. और उन लोगों का नाम, जिनको उनके रहते यह कस्बा झुक कर प्रणाम करता रहा. व्योमेश जी की एक कविता का शीर्षक जब-तब याद आता है – ‘बहुत सारे संघर्ष स्थानीय रह जाते हैं’.
बरहज का लिखित इतिहास बहुत पुराना नहीं है. कहते हैं, इसका नाम किन्ही ‘बरहना बाबा’ के नाम पर पड़ा. वो नदी के किनारे रहते थे. यह लगभग वही समय होगा जब दिल्ली में शाहजहां का शासन होगा. बरहना बाबा की मृत्यु बिच्छू के डंक मारने से हुई थी. मरते हुए उन्होंने बिच्छुओं की प्रजाति को बरहज से खत्म हो जाने का शाप दिया था. यह सच हो या कपोल-कल्पित, बरहज में बिच्छू सचमुच नहीं मिलते. मैंने आज तक कभी यहाँ कोई बिच्छू नहीं देखा न ही और कोई ऐसा कहता है.

कोई डेढ़ सौ साल पहले (सन 1874-76) इधर से एक ब्रिटिश आर्कियॉलॉजिस्ट Alexander Cunningham अपने सहयोगी A. C. L. Carlleyle के साथ गुज़रा था, जिसने इस जगह के बारे में लिखा है. उसने कहा है – यह ब्राह्मणों की बस्ती थी जिन्हें मुस्लिम शासकों ने इस्लाम स्वीकार करवाया था. उन्हीं ‘बिरहमनों’ में से कोई ‘बरहना बाबा’ हुए थे, जिनके नाम पर यह कस्बा बसा. ‘गोरखपुर गजेटियर – 1908’ में भी यही सब बातें दर्ज हैं.

बरहज के बारे में ज्यादा बातें उस समय के बाद की सुनाई देती हैं, जब से अनन्त महाप्रभु बरहज में आए. जब वे बरहज में आए तब उनकी अवस्था 99 साल की थी. वे 1857 की लड़ाई में भूमिगत हुए थे और कई वर्षों बाद साधुओं के वेश में 1876 में बरहज पहुँचे थे. यहाँ आकर उन्होंने तपस्या की और आश्रम की स्थापना की. उनकी मृत्यु के समय उनकी अवस्था 139 साल की थी. उस समय उनकी भौंहें इतनी लटक जाती थीं कि आँखों को ढँक लेती थीं. देखने के लिए उन्हें अपनी भौंहों को ऊपर उठाना पड़ता था. उनके शिष्य बाबा राघवदास मराठी ब्राह्मण थे जो अनन्त महाप्रभु का नाम सुन कर पंद्रह वर्ष की अवस्था में घर से बरहज भाग आए थे. बाबा राघवदास आश्रम पर कम और स्वतंत्रता आंदोलनों में ज़्यादा रहते थे. उन्होंने बरहज के कई युवकों को स्वतंत्रता-आंदोलना का रास्ता दिखाया. रामप्रसाद बिस्मिल की शहादत के बाद सबसे पहले इन्हीं कुछ युवकों ने उनकी चिता से राख लाकर बरहज में उनकी समाधि बनाई. आज भी यह समाधि बरहज-आश्रम में मौजूद है. 1921 में गाँधी जी गोरखपुर आए थे, तो बाबा राघवदास के साथ बरहज से चार युवक गोरखपुर गए थे. वहाँ ये शान्ति-पाठ कर रहे थे. गाँधीजी एक नवयुवक के सामने रुके. पूछा – क्या पढ़ रहे हो ?

– शान्तिपाठ कर रहे हैं.

गाँधी जी – देश के लिए क्या करोगे ?

– खद्दर पहनेंगे, चरखा चलाएँगे, जेल जाएँगे.

गाँधी जी – यह सब तो करना, लेकिन उर्दू ज़रूर पढ़ना.

और गाँधीजी अपनी एक माला उस लड़के के गले में डाल के बढ़ गए.

********

1942 में कैप्टन मूर की गोली से दो प्रदर्शनकारी, विश्वनाथ मिश्र और जगन्नाथ मल्ल, शहीद हो चुके थे. इससे पहले 1939 में बरहज में छोटे व्यापारियों के हक़ में हुए आंदोलन में कई लोग जेल जा चुके थे. बरहज की सड़कों पर किनारे-किनारे चौकी लगा के लोग सामान बेचते थे

Не удается загрузить Youtube-плеер. Проверьте блокировку Youtube в вашей сети.
Повторяем попытку...
Barhaj ka itihas | बरहज का इतिहास | जिला-देवरिया,उत्तर प्रदेश भारत |बरहना बाबा,राघवदास की तपोभूमि

Поделиться в:

Доступные форматы для скачивания:

Скачать видео

  • Информация по загрузке:

Скачать аудио

Похожие видео

Как описана ВТОРАЯ МИРОВАЯ в учебниках ЯПОНИИ

Как описана ВТОРАЯ МИРОВАЯ в учебниках ЯПОНИИ

Загадки картины

Загадки картины "ТРИ БОГАТЫРЯ": что на самом деле Васнецов изобразил на легендарном полотне

Рогоз. Доступная еда в природе.

Рогоз. Доступная еда в природе.

РЫСЬ В ДЕЛЕ... Рысь против волка, койота, змеи, оленя!

РЫСЬ В ДЕЛЕ... Рысь против волка, койота, змеи, оленя!

Октябрь 1941 глазами немецкого генерала

Октябрь 1941 глазами немецкого генерала

Complete Uttarpradesh सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश के मंडल और जिले🎯सम्पूर्ण Video By Azad Sir For UPPSC

Complete Uttarpradesh सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश के मंडल और जिले🎯सम्पूर्ण Video By Azad Sir For UPPSC

То, что Китай строит прямо сейчас, лишит вас дара речи

То, что Китай строит прямо сейчас, лишит вас дара речи

АУДИО. Как звучал древнерусский язык? • Подкаст Arzamas о русском языке • s01e01

АУДИО. Как звучал древнерусский язык? • Подкаст Arzamas о русском языке • s01e01

Тартария новые факты. Пирамиды гробницы императоров и столица. Становление и распад Великой Империи

Тартария новые факты. Пирамиды гробницы императоров и столица. Становление и распад Великой Империи

Учебное пособие по секстанту: принцип работы секстанта

Учебное пособие по секстанту: принцип работы секстанта

History Of Uttar Pradesh - Ancient History Of Uttar Pradesh For UPPSC, STATE PCS & All Govt Exams

History Of Uttar Pradesh - Ancient History Of Uttar Pradesh For UPPSC, STATE PCS & All Govt Exams

66 миллионов лет назад: последний день динозавров

66 миллионов лет назад: последний день динозавров

Хиросима: День, когда упало небо | Многоязычный документальный фильм

Хиросима: День, когда упало небо | Многоязычный документальный фильм

ВСТРЕЧА В ЛЕСУ – Самый ВДОХНОВЛЯЮЩИЙ фильм года! Народ не знающий своего прошлого...

ВСТРЕЧА В ЛЕСУ – Самый ВДОХНОВЛЯЮЩИЙ фильм года! Народ не знающий своего прошлого...

Тропики и полярные круги

Тропики и полярные круги

Почему средневековое железо никогда не ржавело, а ваше умирает через 2 года

Почему средневековое железо никогда не ржавело, а ваше умирает через 2 года

Документальный фильм о СЕВЕРНОЙ КОРЕЕ: Тёмная правда о тайной жизни роскоши и власти Ким Чен Ына!

Документальный фильм о СЕВЕРНОЙ КОРЕЕ: Тёмная правда о тайной жизни роскоши и власти Ким Чен Ына!

ЧТО КУСТО УВИДЕЛ ЧТО НА ДНЕ БАЙКАЛА! ЭТО СКРЫВАЛИ В СССР?

ЧТО КУСТО УВИДЕЛ ЧТО НА ДНЕ БАЙКАЛА! ЭТО СКРЫВАЛИ В СССР?

Почему римский БЕТОН прослужит 2000 лет, а наш — умрёт через 50 лет

Почему римский БЕТОН прослужит 2000 лет, а наш — умрёт через 50 лет

Документальный фильм о Новой Зеландии: самая странная страна в мире!

Документальный фильм о Новой Зеландии: самая странная страна в мире!

© 2025 ycliper. Все права защищены.



  • Контакты
  • О нас
  • Политика конфиденциальности



Контакты для правообладателей: [email protected]