कर्म और भक्ती
Автор: puranicLifeLessons
Загружено: 2026-01-10
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इस वीडियो में पुराणिक लाइफ लेसन पर हम श्रीमद् भागवत स्कंध 1, अध्याय 5 – “नारद मुनि के उपदेश” – को सरल भाषा में समझते हैं।
इस अध्याय में देवर्षि नारद, व्यासदेव को समझाते हैं कि केवल धर्म, ज्ञान और कथा लिख देना काफ़ी नहीं है; जब तक भगवान श्रीकृष्ण की नाम‑रूप‑लीला और उनकी शुद्ध भक्ति का सीधा glorification नहीं होगा, तब तक हृदय को सच्चा संतोष नहीं मिलेगा।
वीडियो के अंत में हम देखेंगे कि नारद जी के ये उपदेश आज की हमारी लाइफ़ पर कैसे लागू होते हैं – कैसे हम भी अपने काम, ज्ञान और आध्यात्मिक साधना को भगवान‑केंद्रित बनाकर अंदर की खाली जगह को भर सकते हैं।
“नारद ने व्यासदेव से क्या कहा?”
“सब कुछ लिखा… फिर भी गलती हो गई”
“धर्म लिखा, भक्ति भूल गए?”
“भागवत ऐसे क्यों लिखी गई?”
“जब नारद ने व्यासदेव को रोका…”
“ये भूल हम भी हर रोज़ करते हैं”
“सिर्फ़ धार्मिक बनोगे या भक्त भी?”
“ज्ञान बहुत… पर प्रेम कहाँ?”
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