बसंतकापदगोकुल गाम सुहावानौ सब मिल खेले फाग स्वर श्री विठ्ठलदास बापोदरा राग गौरी तालतीनतालहवेलीसंगीत
Автор: Manhar Bapodara
Загружено: 2026-02-14
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बसंत का पद गोकुल गाम सुहावानौ सब मिल खेले फाग स्वर श्री विठ्ठलदास बापोदरा राग गौरी ताल तीनताल हवेली संगीत पुष्टी भक्ति सरल भक्ति संगीत पुष्टि यमुने भजो @manharbapodara9902गोकुल गाम सुहावानौ सब मिल खेले फाग ||
मोहन मुरली बजावे गावे गौरि राग ||१||
नर नारी एकत्र आये आए नंद दरबार ||
साजै जालर किन्नरी आवज ढफ कठतार ||२||
चोवा चंदन अरगजा औरु कस्तूरी मिलाई ||
बाल गोविंद कौ छिरकत शोभा बरनी न जाई ||३||
बुका बंदन कुँमकुँमा ग्वालन लिये अनेक ||
जुवती जुथ पे डारी ही हो अपने अपने टेक ||४||
सुर कौतूक जो थकित भये थकित भये थकि रहे सूरज चंद ||
कृष्ण दास प्रभु विहरत गिरिधर आनंद कंद ||३||
पंक्ति १
गोकुल गाम सुहावानौ सब मिल खेले फाग |
मोहन मुरली बजावे गावे गौरि राग ||१||
अर्थ : गोकुल गाँव अत्यंत मनोहर हो उठा है। सभी मिलकर फाग (होली) खेल रहे हैं। श्रीकृष्ण मुरली बजाते हुए मधुर गौरी राग में गायन कर रहे हैं।
भाव :यहाँ वसंत-उत्सव और रासिक वातावरण है।कृष्ण केवल रंग नहीं खेलते—वे स्वर, राग और लीलामय संगीत से सम्पूर्ण गोकुल को रस में डुबो देते हैं। मुरली स्वयं आनंद की उद्घोषणा बन जाती है।
पंक्ति २
नर नारी एकत्र आये आए नंद दरबार |
साजै जालर किन्नरी आवज ढफ कठतार ||२||
अर्थ : स्त्री -पुरुष सभी एकत्र होकर नंदबाबा के दरबार में आए हैं। वहाँ झांझ, किन्नरी, ढफ और कठतार जैसे वाद्य सज-धज कर बज रहे हैं।
भाव :यह समूहिक उल्लास का दृश्य है।
नंद-दरबार केवल राजसभा नहीं—यह भक्ति, संगीत और सामूहिक आनंद का केंद्र बन गया है। लोक-वाद्यों की ध्वनि गोकुल के सहज रस को प्रकट करती है।
पंक्ति 3
चोवा चंदन अरगजा औरु कस्तूरी मिलाई |
बाल गोविंद कौ छिरकत शोभा बरनी न जाई ||३||
अर्थ : चोवा, चंदन, अरगजा और कस्तूरी को मिलाकर बाल गोविंद पर छिड़का जा रहा है, जिसकी शोभा का वर्णन करना असंभव है।
भाव :यह सेवा-भाव से भरा शृंगार-क्षण है।
बाल कृष्ण को रंगों से नहीं, सुगंधों से स्नान कराया जा रहा है—भक्ति इंद्रियों के पार जाकर रस बन जाती है। यहाँ प्रेम ही अलंकार है।
पंक्ति ४
बुका बंदन कुँमकुँमा ग्वालन लिये अनेक |
जुवती जुथ पे डारी ही हो अपने अपने टेक ||४||
अर्थ :गोपियाँ अनेक प्रकार की बुका, वंदन और कुंकुम लिए हुए हैं। वे अपने-अपने समूह (जुथ) पर रंग डाल रही हैं।
भाव :यहाँ लाज, हास्य और आत्मीय खेल है।
हर गोपी का अपना दल, अपना भाव, अपना प्रेम है—फाग केवल रंगों का नहीं, व्यक्तिगत अनुराग और सामूहिक रस का उत्सव बन जाता है।
कठिन शब्दार्थ
फाग – होली का उत्सव,गौरी राग – एक कोमल, मधुर शास्त्रीय राग,जालर – झांझ/झिल्लीदार वाद्य,किन्नरी – तंत्री वाद्य,ढफ – ढोलक जैसा लोक वाद्य,कठतार – तंत्री वाद्य (कत्थक/रबाब वर्ग),चोवा – सुगंधित द्रव्य,अरगजा – चंदन-सुगंध मिश्रण,बुका – रंगीन सुगंधित चूर्ण,जुथ – समूह
टेक – दल/पक्ष/अपनी ओर
HAVELI SANGIT PUSHTI MARG SANGIT
VASANT DHAMAR PAD
RAGA :GAURI TAL :TINTAL
WRITTEN BY SHREE NAGARIDAS
SING BY SHRI VITHALDAS VALLABHDAS BAPODARA
SANKALAN AND PUBLISH BY MANHARLAL VITHALDAS BAPODARA MOBILE NO.9824635506 PLEASE INFORM TO YOUR INTERESTED VAISHNAVAS FOR SUPPORT OF THIS TYPE OF BHAVANATMAK BHAKTI PUSHTI SARAL HAVELI SANGEET इस प्रकार के भावात्मक पुष्टिमार्गीय हवेली संगीत में आपका योगदान हमारे लिए बहुत जरुरी है | हमारी यह विनंती है कि आप शेर (SHARE)कीजिए और like और subscribe करनेके लिए उत्साहित कीजिए | રસ ધરાવતા વૈષ્ણવોનું આ પ્રકારના ભાવાત્મક પુષ્ટિમાર્ગીય હવેલી સંગીતમાં આપનું યોગદાન અમારા માટે બહુ જરૂરી છે.અમારી આપને વિનંતી છે કે વૈષ્ણવોને share કરીને like અને subscribe કરાવીને આ કાર્યમાં સહકાર આપો . SANKALAN AND PUBLISH BY MANHARLAL VITHALDAS BAPODARA MOBILE NO.9824635506
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