646. क्रूस तूने अपनाया प्रभु Krus tune apnaya Prabhu
Автор: संगीत सागर Sangeet Sagar
Загружено: 2021-03-15
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646. क्रूस तूने अपनाया
क्रूस तूने अपनाया प्रभु
मुक्ति जो मुझको देता
तुझसे दूर रहूँ मैं ये नहीं हो सकता - 2
1. पावन मस्तक पे है काँटों की चुभन
कोड़ों की मार सहता कमजोर बदन – 2
आँसू बहाऊँ नहीं मैं , ये नहीं हो सकता - 2
2. नयनों से नीर नहीं खून बहता
छेदित हृदय से पानी झरता - 2
आँसू बहाऊँ नहीं मैं , ये नहीं हो सकता
3. क्या दोष किया था , कोई तो बताओ
क्या होगा इस जहाँ का , अब तो सुनाओ - 2
आँसू बहाऊँ नहीं मैं , ये नहीं हो सकता 2
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