हम परदेसी पंछी साधो इणी देश का नाही || Hum Pardesi Panchhi re Sadhu bhai
Автор: Prahlad Singh Tipanya Official
Загружено: 2021-08-20
Просмотров: 1607821
Описание:
हम परदेसी पंछी साधो इणी देश का नाही || Hum Pardesi Panchhi re Sadhu bhai
_______________________________________________________________________
Credits
Main Vocal : Padmashri Prahlad Singh Tipaniya
Choras & Manjira : Ashok Tipaniya
Violin : Devnarayan Saroliya
Dholak : Ajay Tipaniya
Harmonium : Dharmandra Tipaniya
Khadtal : Himanshu Tipaniya
Sound Mixing : Peter jamra
Video Editing : Mayank Tipaniya
_______________________________________________________________________________
lyrics
हम परदेशी पंछी रे साधु भाई
साखी- हम वासी वा देश के ,और धरण गगन दोई नाई ।
शब्द मिलावा हो रहा, और देह मिलावा नाई ।।
बिन पवन का पंत है, और बिन बस्ती का देश ।
बिना पिंड का पुरुष है , और कहै कबीर संदेश ।।
सिरगुण की सेवा करो , और निर्गुण का करो ध्यान।
अरे निर्गुण सिरगुण के परे , और तहाँ हमारा ध्यान।।
भजन - हम परदेशी पंछी रे साधु भाई , इणी देश का नाही ,
इणी देश रा लोग अचेता , पल - पल परलय में जाई।टेका ।
१ मुख बिन बोलना पग बिन चलना बिना पंखों से उड़ जाई ।
इना सूरत की लोय हमारी , अनहद माई ( ठहराई ) ओलखाई ॥
२ छाया में बैठूं तो अग्नि सी लागे , धूप बहुत शितलाई ।
छाया धूप से मोरे सतगुरू न्यारा , मै सतगुरू के माई ॥
3. आठों पहर अड़ा रहे आसन , कबहूँ न उतरेगा साँई ।
ज्ञानी रे ध्यानी पचपच मर गया , उणी देश केरा माई ॥
4. निर्गुण रूपी है मेरे दाता , सिरगुण नाम धराई ।
मन पवन दोनों नहीं पहुँचे , उणी देश केरा माई ॥
5. नख - शिख नैन शरीर हमारा , सतगुरू अमर कराई ।
कहै कबीर मिलो निर्गुण से , अजर अमर हो जाई
Повторяем попытку...
Доступные форматы для скачивания:
Скачать видео
-
Информация по загрузке: