तुम ही हो मर्यादा, तुम ही हो आशा | श्री राम का भावपूर्ण भजन | Ram Bhajan
Автор: Pray Music - Sandhya
Загружено: 2025-10-29
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"जय रघुनंदन, जय सिया-राम।"
प्रस्तुत है मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का एक भावपूर्ण भजन। यह भजन श्री राम के सम्पूर्ण चरित्र को नमन करता है।
इसमें उनके 'मर्यादा' स्वरूप से लेकर 'करुणा' स्वरूप तक का वर्णन है। यह भजन उनके पिता के वचन के लिए वनवास जाने, शबरी के जूठे बेर खाने, केवट को सखा मानने, और अधर्म का नाश कर धर्म की ध्वजा फहराने की लीलाओं को याद दिलाता है।
"राज छोड़, काँटों पे चले जो अविराम,
जय रघुनंदन, जय सिया-राम।"
राम नाम मन के अंधकार को मिटाने वाला सूर्य है। इस भजन को सुनकर अपने मन को शांति प्रदान करें।
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जय श्री राम!
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तुम ही हो मर्यादा, तुम ही हो आशा, तुम ही हो करुणा, तुम ही परिभाषा। मन के अँधियारे में, सूरज से तुम, जय रघुनंदन, जय सिया-राम। मेरे राम, मेरे राम, जय रघुनंदन, जय सिया-राम।
अवध के दुलारे, दशरथ नंदन, कौशल्या के प्यारे, जगत के वंदन। पिता के वचन पर, सब कुछ त्यागा, चौदह बरस वन का, कठिन पथ मांगा। राज छोड़, काँटों पे चले जो अविराम, जय रघुनंदन, जय सिया-राम। मेरे राम, मेरे राम, जय रघुनंदन, जय सिया-राम।
शबरी के बेरों में, प्रेम को चखा, केवट को भी तुमने, सखा ही रखा। पत्थर को तारा, अहिल्या को उबारा, दीन-दुखियों के, तुम ही हो सहारा। जो भी पुकारे, झट से आए काम, जय रघुनंदन, जय सिया-राम। मेरे राम, मेरे राम, जय रघुनंदन, जय सिया-राम।
धर्म की ध्वजा ले, अधर्म को मिटाया, लंका में जाके, रावण को हराया। सत्य की विजय का, तुम ही हो प्रमाण, तुम्हीं में बसे हैं, हमारे ये प्राण। तुमसे शुरू हो, तुम पे ही हो विश्राम, जय रघुनंदन, जय सिया-राम।
तुम ही हो मर्यादा, तुम ही हो आशा, तुम ही हो करुणा, तुम ही परिभाषा। मन के अँधियारे में, सूरज से तुम, जय रघुनंदन, जय सिया-राम। मेरे राम, मेरे राम, जय रघुनंदन, जय सिया-राम।
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