भाषा शिक्षण | शब्द पहचान (Word Recognition)|भाषा सीखने की प्रक्रिया |
Автор: प्रत्यभिज्ञा
Загружено: 2026-01-25
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भाषा सीखने की प्रक्रिया (Language Learning Process) एक क्रमिक यात्रा है, जिसे हम निम्नलिखित चरणों में बाँट सकते हैं:
क. मौखिक आधार (Oral Language Foundation)
शब्द पहचान से पहले बच्चा शब्दों को 'सुनता' और 'बोलता' है। यदि बच्चे के पास मौखिक शब्दावली समृद्ध है, तो उसके लिए लिखित शब्दों को पहचानना आसान हो जाता है।
ख. ध्वनि और प्रतीक का संबंध (Phonological Awareness)
यह शब्द पहचान की पहली सीढ़ी है। यहाँ बच्चा यह समझता है कि:
बोली जाने वाली ध्वनियाँ (Sounds) अलग-अलग होती हैं।
इन ध्वनियों को खास प्रतीकों या वर्णों (Symbols/Letters) से दर्शाया जाता है।
उदाहरण: 'क' की ध्वनि और 'क' की बनावट के बीच संबंध बनाना।
ग. डिकोडिंग (Decoding - कूटवाचन)
यह वर्णों को जोड़कर शब्द बनाने की प्रक्रिया है।
बच्चा वर्णों को पहचानता है, उनकी ध्वनियों को मिलाता (Blending) है और फिर शब्द बोलता है।
जैसे: म + ट + र = मटर।
घ. स्वचालित शब्द पहचान (Sight Word Recognition)
जब बच्चा किसी शब्द को बार-बार देखता है, तो उसे डिकोडिंग की ज़रूरत नहीं पड़ती। वह शब्द को देखते ही पहचान लेता है।
NEP 2020 के अनुसार, 'दृष्टि शब्द' (Sight Words) पढ़ने की गति और प्रवाह (Fluency) को बढ़ाते हैं।
ङ. अर्थ निर्माण (Comprehension/Meaning Making)
शब्द पहचान तब तक अधूरी है जब तक बच्चा उसका अर्थ न समझे।
प्रक्रिया का अंतिम लक्ष्य यह है कि बच्चा शब्द को पढ़ते ही उसके अर्थ की मानसिक छवि (Mental Image) बना ले।
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