Lynching and CM Nitish बिहार में भीड़ का कानून? साल बदला, मगर मुसलमान अब भी निशाने पर
Автор: The Swatantra
Загружено: 2026-01-02
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नया साल आया है… लेकिन क्या बिहार में हालात बदले हैं?
मोहम्मद अथर हुसैन का मामला अभी खत्म भी नहीं हुआ था कि मधुबनी से एक और दर्दनाक खबर सामने आ गई।
सुपौल जिले के रहने वाले मजदूर मोहम्मद मुर्शीद उर्फ़ नूरशेद आलम को सिर्फ इसलिए बेरहमी से पीटा गया क्योंकि उन्हें “बांग्लादेशी” बताकर शक किया गया।
रोज़ी-रोटी की तलाश में आए एक भारतीय नागरिक के साथ हुई यह हिंसा, बिहार की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
इस वीडियो में हम बात करेंगे—
▪️ मधुबनी में मॉब लिंचिंग की कोशिश की पूरी घटना
▪️ क्यों मुसलमानों को बार-बार शक और हिंसा का सामना करना पड़ रहा है
▪️ गृह मंत्री बनने के बाद सम्राट चौधरी के कार्यकाल में बढ़ते सवाल
▪️ AIMIM प्रवक्ता एडवोकेट आदिल हसन का तीखा बयान
▪️ प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर उठते अहम सवाल
क्या बिहार में अब भीड़ कानून से ऊपर हो चुकी है?
क्या मुसलमान होना आज भी खतरे की पहचान बन गया है?
👉 वीडियो को अंत तक देखें
👉 सवाल पूछिए, क्योंकि सवाल पूछना ज़रूरी है
👉 सच के साथ खड़े हों
📢 हम मांग करते हैं कि दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी,
पीड़ित को न्याय और सुरक्षा,
और मॉब हिंसा के खिलाफ सख़्त कार्रवाई की जाए।
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