1945 का शर्मनाक सच: INA के गुमनाम शहीद | INA Soldiers & Nilganj Massacre
Автор: Krishna Bisht Digital
Загружено: 2026-01-18
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क्या आप जानते हैं कि 1945 में नीलगंज मे हजारों आजाद हिंद फौज के सैनिकों के साथ क्कोया हुवा था ? ब्रिटिश क्रूरता का यह छिपा सच आज भी दबा हुआ है।
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, सितंबर 1945 में कोलकाता के पास नीलगंज डिटेंशन कैंप में ब्रिटिश फौज ने मशीनगनों से निहत्थे INA सैनिकों पर गोलियां बरसाईं। यह कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि सुनियोजित कत्लेआम था। स्थानीय गवाहों के अनुसार, नहर का पानी दिनों तक लाल रहा। ब्रिटिश ने INA सैनिकों को 'ब्लैक', 'ग्रे' और 'व्हाइट' कैटेगरी में बांटा, जहां 'ब्लैक' वाले कट्टर देशभक्तों को सबसे बड़ा खतरा माना गया।
नीलगंज नरसंहार से ठीक पहले, ब्रिटिश ने अध्यादेश XLI लागू किया, जो अधिकारियों को असीमित बल प्रयोग की छूट देता था। आधिकारिक रिकॉर्ड में सिर्फ 5 मौतें बताई गईं, लेकिन चश्मदीदों और डायरी एंट्रीज से पता चलता है कि 2300 से ज्यादा शहीद हुए। यह सिर्फ नीलगंज तक सीमित नहीं - झिकरगाछा कैंप में भी 1000-1500 सैनिक मारे गए। कुल मिलाकर, बंगाल के कैंपों में 10,000 से अधिक INA वीरों का बलिदान हुआ।
यह ब्रिटिश राज की अंतिम क्रूरता थी, जो 1942 के हिजली फायरिंग से भी बड़ा था। नीलगंज नरसंहार ने INA ट्रायल्स को जन्म दिया, जिससे रॉयल इंडियन एयर फोर्स स्ट्राइक और RIN नौसेना विद्रोह भड़का। 20,000 नाविकों ने 'जय हिंद' के नारे लगाए, और ब्रिटिश समझ गए कि भारतीय सेना अब उनके कंट्रोल से बाहर है।
पूर्व PM क्लेमेंट एटली ने कबूल किया कि भारत की आजादी का असली कारण सुभाष चंद्र बोस और INA का प्रभाव था, न कि गांधीजी के आंदोलन। लेकिन आजादी के बाद, नेहरू सरकार ने इस नरसंहार को दबाया। INA सैनिकों को सेना में वापस लेना 'खतरनाक' बताया गया, और शहीदों की जगह पर जूट रिसर्च सेंटर बना दिया गया।
यह वीडियो भावनात्मक लेकिन जिम्मेदार न्यूज एनालिसिस है, जो इतिहास की उपेक्षा पर रोशनी डालता है। अब समय है न्याय का - सरकार को स्मारक बनाना चाहिए।
टाइमस्टैम्प्स:
00:00 - इंट्रो: द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का दृश्य
01:15 - नीलगंज कैंप में कत्लेआम का विवरण
02:45 - INA सैनिकों का वर्गीकरण: ब्लैक कैटेगरी का रहस्य
04:20 - सुनियोजित षड्यंत्र: अध्यादेश XLI
06:10 - आंकड़ों का खेल: 2300+ मौतें
07:50 - मौत का गलियारा: झिकरगाछा और अन्य कैंप
09:30 - विद्रोह की चिंगारी: INA ट्रायल्स और RIN Mutiny
11:40 - एटली का कबूलनामा: आजादी का असली कारण
13:20 - आजाद भारत का मौन: नेहरू की भूमिका
15:00 - निष्कर्ष: न्याय का समय
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डिस्क्लेमर: “This documentary is based on historical accounts and public memory.”
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