भारत में धार्मिक शिक्षा क्यों ज़रूरी है? | ब्रिटेन के शिक्षा अधिनियम से सीखें
Автор: ब्रह्मबोधि
Загружено: 2025-10-16
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हर सरकार का दायित्व है कि बच्चे बड़े होकर सभ्य और जागरूक नागरिक बनें। ब्रिटेन ने 1996 के Education Act के तहत धार्मिक शिक्षा को अनिवार्य बनाया है। वहां 93% बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं और सभी धर्मों के बारे में तथ्यात्मक जानकारी दी जाती है—उनके सिद्धांत, शास्त्र, त्यौहार और प्रेरक व्यक्तित्व। 👉 भारत में धर्मनिरपेक्षता के नाम पर बच्चों को अपने धर्म और अन्य धर्मों से दूर रखा गया। 👉 नतीजा यह हुआ कि बच्चे बचपन से ही संकीर्ण मानसिकता और नफ़रत की ओर बढ़ जाते हैं। 👉 धार्मिक शिक्षा का उद्देश्य किसी एक धर्म का प्रचार नहीं, बल्कि सभी धर्मों की सच्चाई, अच्छाई और सीमाओं को समझाना है। इस वीडियो में जानिए कि क्यों भारत को भी ब्रिटेन की तरह धार्मिक शिक्षा को पाठ्यक्रम में शामिल करना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ी अधिक सभ्य, जागरूक और सहिष्णु बन सके।
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