होलिका दहन पहली बार देखा और आखिरी होली बैठक😇: कान के खोने का दुख🥺
Автор: DEEPALI RAUTELA NAYAL
Загружено: 2026-03-03
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Holika Dahan 2026:
होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, जो भक्त प्रहलाद की रक्षा और होलिका के जलने की पौराणिक कथा को याद दिलाता है। यह फाल्गुन पूर्णिमा की रात, होली से एक दिन पहले लकड़ियों के ढेर को जलाकर, पूजा-अर्चना और अग्नि के चारों ओर परिक्रमा (Parikrama) के साथ मनाया जाता है।
पहली बार होलिका दहन के बारे में मुख्य बातें:
मूल स्थान: मान्यता अनुसार, पहली बार होलिका दहन बिहार के पूर्णिया जिले के सिकलीगढ़ धरहरा गांव में किया गया था।
पौराणिक कथा: हिरण्यकशिपु की बहन होलिका, जिसे आग में न जलने का वरदान था, वह भक्त प्रहलाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठी थी। भगवान विष्णु के भक्त प्रहलाद सुरक्षित रहे, जबकि गलत उद्देश्य के कारण होलिका जल गई।
महत्व: यह अग्नि बुराई के अंत, शुद्धि और सकारात्मकता का प्रतीक है।
परंपरा: लोग होलिका में सूखे उपले, लकड़ियाँ और अग्नि में अन्न, नारियल अर्पित करते हैं।
समय: यह आमतौर पर सूर्यास्त के बाद, पूर्णिमा तिथि पर, भद्रा रहित काल में मनाया जाता है।
यह आयोजन एकता और भक्ति का संदेश देता है, जहाँ लोग साथ मिलकर नकारात्मकता को जलाते हैं।
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