Jai Deva Chandohi | Narender Thakur | Ganpati Bhajan | Dev Thakur | Sandeep Thakur | iSur Studios
Автор: iSur DHARMIK
Загружено: 2024-09-05
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आदि गणपति श्री चंडोही महाराज जी का मंदिर मंडी जिला के भटवाड़ी नामक गााँव में स्थित है। प्रभु जी प्रथम पूज्य श्री गणेश जी के स्वरूप हैं। ऐसा माना जाता है कि गणपति महाराज जी 5 गढ़ के अधिष्ठाता हैं जिसका दायरा देवरी खड से चैहटी गढ़ तक है। वर्तमान में इनकी हारयान ज़दवाई खड से देवरी खड तक हैं। इन्हे गढ़ का देवता माना जाता है और इनके हारयान वासियों को गढ़ीये कहकर पुकारा जाता है।
पौराणिक मान्यताएँ: भटवाड़ी गांव की मदैनी नामक खानदानी के किसी ब्राह्मण व्यक्ती को सपने में प्रभू के मुख स्वरूप में दर्शन हुए। उन्हे सपना हुआ कि ओडीधार नामक स्थान पर प्रभूजी मुख स्वरूप में प्रकट हुए हैं। दूसरे दिन सुबह होते ही उक्त व्यक्ति जब उस स्थान पर गये तो वहां वास्तव में ही उन्हे प्रभूजी के दर्शन मुख रूप में हुए। किर वहां से प्रभू के मुख को भटवाड़ी गााँव लाया गया। वर्तमान में इसी गााँव में प्रभूजी का भव्य मंदिर व भंडार है।
रियासतकालीन इतिहास: मण्डी रियासत के राजा प्रभूजी में विशेष आस्था रखते थे। एक बार कुल्लू रियासत के साथ युद्ध में प्रभूजी के आशीर्वाद से मण्डी रियासत को विजय प्राप्त हुई थी। सुकेत रियासत के राजा ने सौली खड तक कब्जा कर लिया था। फिर मण्डी रियासत के राजा ने प्रभूका प्रखंड रूप डोरी में धारण कर सुकेत सेना को भन्गरोटू तक भगा दिया थी। मण्डी रियासत के 4
राजकुमारों का मुंडन संस्कार भी प्रभूजी के मंदिर में संपन्न हुआ था। मण्डी रियासत के राजा प्रभू
जी का गुणगान करते नहीं थकते थे और उनकी असीम भक्ति के कारण उनपर प्रभूजी की विशेष कृपा थी।
गढ़ क्षेत्र के अन्य देवी-देवताओं के साथ सबंध: इसी गढ़ क्षेत्र के अन्य देवी-देवताओं के साथ प्रभूजी
के पौराणिक सबंध हैं। इनमें ऋषि पराशर जी के साथ प्रभूजी का दादा पोते का रिश्ता माना जाता है।
तुंगा महामाई जो कि वास्तव में अशोक सुन्दरी जी का स्वरूप हैं और माता हनोगी जी, के साथ इनका
भाई-बहन का रिश्ता माना जाता है।
तुंगा माता जी के मंदिर परिसर में रात्रि ठहराव की आज्ञा केवल प्रभूजी को ही है। हनोगी माता जी के मंदिर में नवरात्रों के दौरान प्रभूजी उपस्थित रहते हैं। मण्डी शहर में भी तुंगा मां का मंदिर है जहाँ केवल प्रभूजी ही मंदिर परिसर में प्रवेश कर सकते हैं।अन्य देवी-देवताओं को इसकी आज्ञा नहीं दी जाती।
ऋषि पराशर भंडार बांधी से शेष फूल: गढ़ क्षेत्र में यदि सुखा पड़ जाये तो पराशर ऋषि जी के भंडार गााँव बांधी से प्रभूजी को शेष फूल भेजा जाता है। पराशर जी की आज्ञा से प्रभूजी पराशर का दौरा करते हैं और गढ़ क्षेत्र पर पड़ रही सुखे की मार से गढ़ क्षेत्र के लोगों को बचाते हैं और प्रभूजी की कृपा बारिश के रूप में बरसती हैं और यदि अधिक बरसात हो तो प्रभूजी आपदा की स्थिति में भी गढ़ क्षेत्र की रक्षा करते हैं जिस कारण प्रभूजी को बीझी-बादली का देवता भी माना जाता है।
गणेश चतुर्थी: गणपति महाराज जी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य पर गणेश चतुर्थी का आयोजन प्रभू जी के मंदिर पररसर में बड़ी धूमधाम से किया जाता है। गढ़ क्षेत्र के अलावा प्रदेश के अन्य हिस्सों से भी प्रभू के भक्तजन भारी संख्या में प्रभूजी के दर्शन करने आते हैं। प्रभूजी अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं।
अन्य मेले: प्रभूजी की हारयान में रैन्स,शाला और बाता नामक गांवों में शाहनू मेले, ओडीधार जाच ढांगसी गााँव में दिउण फेरा आदि मेले मनाये जाते हैं। थुआरी नामक गााँव में ऋषि पंचमी के रूप में मनाए जाने वाले मेले में भी प्रभूजी शिरकत करते हैं।
टीपरी नामक स्थान: गढ़ क्षेत्र के टीपरी नामक स्थान पर प्रभूजी का चौंतड़ा स्थित है।
उतुंग गढ़ का राजा: प्रभूजी को उतुंग गढ़ का राजा माना जाता है।
देव रुहाड़ु-जौड़ु: देव रुहाड़ु-जौड़ु प्रभूजी के द्वारपाल हैं।
*प्रभूजी को सतियुग का देवता माना जाता हैं।
*प्रभूजी को बाजे-गाजे का धनी माना जाता है।
*प्रभूजी शांतिप्रिय स्वभाव के हैं।
*ओडीधार नामक जगह पर जिस स्थान पर प्रभूजी प्रकट हुए उस स्थान पर आज भी एक गड्ढा है जो की किसी भी चीज़ से नहीं भरता।
आप सभी पर गणपति महाराज जी की कृपा बनी रहे।
Credits
Singer : Narender Thakur
Lyrics : Krishna Thakur
Music : Sandeep Thakur
Featuring : Dev Thakur
DOP : Ashok Thakur
Edit : Prince Harry
Label & Post Production - iSur Studios
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