नाथों की नगरी बरेली शहर में बसा 6500 वर्ष प्राचीन तथा अनोखा अलखनाथ मंदिर | 4K | दर्शन 🙏
Автор: Tilak
Загружено: 2022-12-11
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संगीत एवम रिकॉर्डिंग - सूर्य राजकमल
लेखक - रमन द्विवेदी
भक्तों नमस्कार! प्रणाम! और सादर अभिनन्दन! भक्तों आज हम आपको अपने लोकप्रिय कार्यक्रम दर्शन के माध्यम से जिस मंदिर की यात्रा करवाने जा रहे हैं वो ऐसा मंदिर है जिसमें महाभारत काल के पहले से भगवान् शिव स्वयंभू शिवलिंग के रूप में विराजमान है, जहाँ श्रद्धा और विश्वास के साथ जाने वाला कोई भी व्यक्ति खाली नहीं लौटता, जहाँ मिलती है हर किसी को मुंह माँगी मुरादें और जहाँ सिद्ध होते हैं सभी के मनोरथ।भक्तों हम बात कर रहे हैं नाथनगरी के नाम से विख्यात उत्तरप्रदेश के बरेली शहर के अलखनाथ मंदिर की।
मंदिर के बारे में: भक्तों देश और प्रदेश की राजधानी के बीच स्थित बरेली का एक नाम नाथनगरी भी है। क्योंकि यहाँ देवाधिदेव महादेव कई प्राचीनतम मंदिर अवस्थित हैं। बरेली धाम में नैनीताल रोड पर किला क्षेत्र में स्थित बाबा अलखनाथ मन्दिर एक ऐसा ही सिद्धस्थल है जहां देवाधिदेव महादेव स्वयंभू शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे। बरेली के धार्मिक स्थलों में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण मंदिरों में से एक है अलखनाथ मंदिर। जो 84 बीघे के विशाल भूभाग पर प्रतिष्ठित है।यह मंदिर नागा साधुओं की प्राचीन तपस्थली होने के कारण इस मंदिर का प्रबंधन आनंद अखाड़ा के नागा साधुओं द्वारा किया जाता है। इस मंदिर हर समय साधु महात्माओं का जमघट लगा रहता है।
मंदिर का इतिहास: भक्तों अलखनाथ मंदिर हजारों वर्षों पुराना है।मंदिर के पास एक आलेख पट लगा हुआ है जिसके अनुसार अलखनाथ मंदिर 6500 वर्षों से अधिक प्राचीन है।यद्यपि इस आलेख पट के अतिरिक्त मंदिर की स्थापना, इतिहास और इसके इतना प्राचीन होने का कोई प्रमाण नहीं है।
मंदिर स्थापना व नामकरण: भक्तों अलखनाथ मंदिर के नामकरण के पीछे का कारण के बारे में लोगों का कहना है कि लगभग एक हजार साल पहले इस क्षेत्र के चारों ओर घना जंगल था। तब नागा साधुओं के आनंद अखाडा ने इस क्षेत्र में धर्म संस्थापना हेतु एक नागा साधू अलखिया बाबा को भेजा था।अलखिया बाबा इस जंगल में आकर एक वटवृक्ष के नीचे तपस्या करने लगे थे। अलखिया बाबा को ना मौसम की परवाह था और न दिन रात की चिंता थी। कहते हैं कि तपस्या के दौरान अलखिया बाबा को ज्ञात हुआ कि जिस स्थान पर वह बैठे हैं वहीं वृक्ष के नीचे शिवलिंग है। तब अलखिया बाबा ने वटवृक्ष के नीचे खोदा तो वहां शिवलिंग रूप में देवाधिदेव महादेव विराजमान थे। अलखिया बाबा ने यहां मन्दिर की स्थापना की। अलखिया बाबा के नाम के चलते ही यहाँ विराजमान महादेव को अलखनाथ तथा इस मन्दिर को अलखनाथ मंदिर के नाम से जाना जाता है।
मुख्य प्रवेशद्वार पर हनुमान जी विशाल मूर्ति: भक्तों अलखनाथ मंदिर के मुख्य द्वार पर कनक भूधराकार रामभक्त हनुमान जी की मूर्ति प्रतिष्ठित है।जिसकी उंचाई लगभग 51 फीट है। हनुमान जी की यह मूर्ति यहाँ आनेवाले भक्तों और श्रद्धालुओं के मन मस्तिष्क में अनायास ही श्रद्धा और भक्ति से नतमस्तक होने को विवश कर देती है।
नजदीकी दर्शनीय स्थल: भक्तों अगर आप नाथनगरी बरेली स्थित अलखनाथ के दर्शन को जा रहे हैं तो बरेली स्थित त्रिवतीनाथ, माखीनाथ, धोतेश्वरनाथ मंदिर, सीताराम मंदिर, आनंद आश्रम, बनखंडीनाथ भागवत महावीर मंदिर भैरवनाथ मंदिर, भोलेनाथ मंदिर, कुरुक्षेत्र नगर चौरासी घट्टा मंदिर, गौरीशंकर मंदिर, हनुमान मंदिर, सिविल लाइंस हरि मंदिर, हाथीवाला मंदिर, साहूकारा, इस्कॉन मंदिर, बरेली जगन्नाथ मंदिर, जगमोहनेश्वर मंदिर कांकेर, कुआंनाथ, लक्ष्मी नारायण मंदिर, एमए काली मंदिर, कालीबाड़ी मंदिर, सेठ गिरधारी लाल मठ, तुलसीस्थल, नवदेवी मंदिर, राधा माधव संकीर्तन मंडल और बी आई शिव मंदिर का दर्शन करना न भूलें। क्योंकि इन स्थानों का दर्शन किये बिना आपकी बरेली यात्रा पूरी नहीं हो सकती।
मन्दिर में है रामसेतु का तैरता पत्थर: नाथ नगरी बरेली धाम के सप्तनाथ मंदिरों में बाबा अलखनाथ मंदिर आस्था का प्रमुख केन्द्र है। नागा सम्प्रदाय के पंचायती अखाड़े द्वारा संचालित इस मंदिर की मान्यता सुदूर पहाड़ों तक है।
मंदिर परिसर: भक्तों अलखनाथ मंदिर परिसर में भगवान शिव समेत अन्य कई देवी देवता भी विराजमान हैं। जिनमें से भगवान् विष्णु, गोवर्धन धारण किये हुए भगवान श्रीकृष्ण, शिव पार्वती, माता दुर्गा, पंचमुखी हनुमान जी, नवग्रह और भगवान् सूर्य की मनमोहक मंदिरों मूर्तियों के साथ साथ कई साधु संतों की समाधियाँ भी स्थापित हैं। इसके अलावा अलखनाथ मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही पीपल वृक्ष के नीचे एक शनि मंदिर स्थापित है। जो पूर्णतः शनि शिंगणापुर की प्रतिकृति प्रतीत होता है।
32 सौ वर्ष पुराना वटवृक्ष:
भक्तों अलखनाथ मंदिर परिसर में एक 3200 (बतीस सौ) वर्ष पुराना वटवृक्ष (बरगद का पेड़) भी है, जिसकी जटाएं उसकी प्राचीनता को प्रमाणित करती हैं। इन सबके बावजूद मंदिर परिसर में रामसेतु वाला पत्थर है जो पानी में डूबता नहीं है।
भक्त को भगवान से और जिज्ञासु को ज्ञान से जोड़ने वाला एक अनोखा अनुभव। तिलक प्रस्तुत करते हैं दिव्य भूमि भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थानों के अलौकिक दर्शन। दिव्य स्थलों की तीर्थ यात्रा और संपूर्ण भागवत दर्शन का आनंद। दर्शन ! 🙏
इस कार्यक्रम के प्रत्येक एपिसोड में हम भक्तों को भारत के प्रसिद्ध एवं प्राचीन मंदिर, धाम या देवी-देवता के दर्शन तो करायेंगे ही, साथ ही उस मंदिर की महिमा उसके इतिहास और उसकी मान्यताओं से भी सन्मुख करायेंगे। तो देखना ना भूलें ज्ञान और भक्ति का अनोखा दिव्य दर्शन। 🙏
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि तिलक किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
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