Katha Pura Mahadev Ki 🕉️I कथा पुरा महादेव की | परशुरामेश्वर धाम की अनकही कहानी | Dayaanand Prajapati
Автор: Kirtan Yug
Загружено: 2024-12-22
Просмотров: 3053
Описание:
With the blessings of Bholenath we are presenting a beautiful untold story of Bhagwan Parshuram & Mahadev "Katha Pura Mahadev Ki" which describes the devotion of Parshuram for Lord Shiv.
🚩 कथा पुरा महादेव की | परशुरामेश्वर धाम की अनसुनी कथा 🕉️
यह वीडियो आपको ले चलेगा परशुरामेश्वर धाम की पावन भूमि पर, जहाँ छुपी है भगवान शिव और परशुराम जी से जुड़ी एक अद्भुत और अनकही कथा।
#bhaktisong #mahadev
Singer - Dayaanand Prajapati
Lyrics & Composer- Dayaanand Prajapati
Music - Taarun Arun
Mix & Master - Yasudaas BC (Maestro Film & Music Studios)
Video - Morvi creations
Special Thanks - Bholenath
© Copyright: Kirtan Yug
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Lyrics
तीनों लोकों के स्वामी , देवों के देव महादेव की है
देके ध्यान सुनते जाना, ये कथा पुरा महादेव की है,
बम बम भोले, जय शिव शंकर.....
जमदग्नि ऋषि कजरी वन में , परिवार संग रहते थे,
कामधेनु गैय्या उनके घर, जिसमें देवता बसते थे,
चार पुत्र थे जमदग्नि के, रेणुका उनकी नारी थी,
परिवार के हर प्राणीं को, कामधेनु अति प्यारी थी,
परशुराम जो पुत्र थे उनके, पिता के थे आज्ञाकारी,
भक्त वो शंकर जी के थे, और विष्णु जी के अवतारी,
बम बम भोले, जय शिव शंकर.....
एक दिन ऋषि न पुत्र थे घर पे, चेला ना कोई चेली थी,
ऋषि की पत्नी आश्रम में, गैय्या के संग अकेली थी,
सहस्त्र बाहू राजा कपटी, आश्रम में आ जाता है,
ऋषि की पत्नी ने देखा, तो उनका मन घबराता है,
सहस्त्र बाहू राजा को , वो गैय्या मन भा जाती है,
कामधेनु को मांग रहा पर, बात ना मानी जाती है,
हठ कर बैठा था वो राजा, मनमानी कर जाता है,
गाय नहीं ले सका ऋषि की, पत्नी को ले जाता है,
बम बम भोले, जय शिव शंकर.....
ऋषि और राजा की पत्नी, सगी सगी दोनों बहनें,
मिलते ही दोनों की आंखों से आंसू लगते बहने,
करती है फरियाद बहन से ,मेरी कुछ इमदाद करो,
जैसे भी हो मुझे यहाँ सेबहन मेरी आज़ाद करो,
राजा की पत्नी उसको, फिर महल के पीछे लाती है,
गुप्त रास्ते का एक नक्शा, फिर उसकाे समझाती है,
गुप्त रास्ते पर चलकर, वो महल के बाहर आती है,
जल्दी जल्दी कदम वो अपने, घर की ओर बढ़ाती है
ऋषि की पत्नी रेणुका देवी, आश्रम में जब आती हैं,
पति परमेश्वर जमदग्नि के , क्रोध से ना बच पाती हैं,
कहा ऋषि ने जाओ रेणुका, टूट गया मन का धागा ,
अब तुम नहीं हो मेरी पत्नी, मैंने तुमको है त्यागा ,
परिवार को छोड़ के स्वामी, भला किधर मैं जाऊंगी,
प्राण हरो हे परमेश्वर मैं और नहीं जी पाऊंगी,
कहा ऋषि ने पुत्रों से तुम, अभी तुरंत ये काम करो,
पिता के हो आज्ञाकारी तो अपनी माँ के प्राण हरो,
जन्म दिया है जिस माँ ने उस माता को नहीं मारेंगे,
तीन पुत्र ने मना किया, ये आज्ञा हम नहीं मानेंगे,
लेकिन चौथे पुत्र ने अपने, फरसे का प्रहार किया,
परशुराम ने पिता की आज्ञा , पर माता को मार दिया,
माँ की हत्या परशुराम , करके मन में पछताते हैं,
याद करें शिव शंकर जी को, रो रो नीर बहाते हैं,
करने लगे घनघोर तपस्या, परशुराम शिव शंकर की,
खाना पीना त्याग दिया, कोई फिक्र ना कांटे कंकर की,
बम बम भोले, जय शिव शंकर.....
परशुराम भगवान् के तप से, शिव शंभू प्रसन्न हुए,
करके दर्शन परशुराम जी, शिव किरपा से धन्न हुए,
बम बम भोले, जय शिव शंकर.....
परशुराम ने शिव जी को , फिर अपना हाल सुनाया है,
पिता के कहने पर अपनी, माता को मार गिराया है,
बम बम भोले, जय शिव शंकर.....
क्या करता मैं अपने पिता का, पुत्र बड़ा आज्ञाकारी,
किंतु माँ की हत्या का , मन में है बोझ बड़ा भारी,
बम बम भोले, जय शिव शंकर.....
मुझसे पाप हुआ है भगवन, कष्ट मेरा ये दूर करो,
मात मेरी जीवित होवे, या मृत्यु मेरी मंजूर करो,
बम बम भोले, जय शिव शंकर.....
परशुराम की माता को शिव जी ने जीवन दान दिया,
तीनों पुत्रों को भी शिव ने, ऋषि के श्राप से मुक्त किया,
बम बम भोले, जय शिव शंकर.....
धन्यवाद करते शंभू को, हाथ जोड़कर जमदग्नि
बड़ा हुआ उपकार जो तुमने, परिवार को मिला दिया ,
बम बम भोले, जय शिव शंकर.....
विनती है एक और हमारी, किरपा कर स्वीकार करो,
बस ही जाओ कजरी वन में, जन जन का उद्धार करो,
बम बम भोले, जय शिव शंकर.....
मान गए शंभू उनकी , आंख से आंसू बहने पर,
स्वयं हुए स्थापित शिव जी , परशुराम के कहने पर,
अन्तर्ध्यान हुए भोले, शिव लिंग रुप हो जाते हैं,
वहीं बैठकर परशुराम , शिव के तप में खो जाते हैं,
बम बम भोले, जय शिव शंकर.....
कहते हैं पुरामहादेव , ये पुरा गाँव का नाम है,
वास्तव में ये सिद्ध पीठ, परशुरामेश्वर धाम है,
कथा पुरामहादेव की है, जो सुनकर ध्यान लगा लेगा,
पार्वती शिव किरपा से, वो लाखों पुण्य कमा लेगा,
सच्चे मन से "दयानन्द", जो पुरा महादेव आते हैं,
किरपा शिव शंकर की होती, मनवांछित फल पाते हैं,
बम बम भोले, जय शिव शंकर.....
गाँव लडूरा की महारानी, दर्शन करने आती हैं,
मेरे भोले बाबा की , उनपर किरपा हो जाती है,
पार्वती शिव किरपा से, रानी की गोद भर जाती है,
शिव के धाम को भव्य रूप से, वही रानी बनवाती हैं,
सावन में लाखों कांवरिया, कांवर यहाँ चढ़ाते हैं,
उनकी चिंता शिव जी करते , वो आनंद मनाते हैं,
लाला मंशा राम ने सुनिए, पुरा गाँव में जन्म लिया,
भूमि दान करी मंदिर को ऊंचा कुल का नाम किया,
उन्हीं पोते और पर पोते, सेवा खूब कमाते हैं,
हवन कराते कभी कीर्तन, भंडारे लगवाते हैं,
बम बम भोले, जय शिव शंकर.....
"दयानन्द" अब कलम रोक दो
कथा यहीं विश्राम करो,
शीश झुकाकर हाथ जोड़कर
शिव जी को प्रणाम करो...
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