हरिद्वार में गंगा किनारे श्री कृष्ण, मां पार्वती और शिव जी, श्री राधा के रूप में हैं विराजमान
Автор: Tilak Patrika
Загружено: 2026-02-11
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"धर्मनगरी हरिद्वार की पौराणिक नगरी कनखल (kankhal) का वर्णन पुराणों (Puran) में मिलता है। कनखल सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा (Brahma) जी के मानस पुत्र राजा दक्ष (Raja Daksh) की नगरी मानी जाती है। कनखल में गंगा (Ganga) के किनारे अपनी लीलाओं से भक्तों को मोह लेने वाले श्री कृष्ण (Krishna) और राधा (Radha) जी का अद्भुत और चमत्कारी मंदिर स्थापित हैं। मान्यताओं के अनुसार कनखल में स्थित राधा-कृष्ण मंदिर में भगवान शिव (Shiv) कृष्ण नहीं बल्कि राधा के रूप में और पार्वती (Parvati) श्री कृष्ण के रूप में विराजमान हैं। मंदिर में जो भी अविवाहित सच्चे मन से 40 दिन तक राधा-कृष्ण की पूजा करते है, उसके विवाह में आ रही रुकावटें दूर हो जाती है। मंदिर का निर्माण लंढोरा की महारानी धर्मकौर जी द्वारा करवाया गया था। महारानी धर्मकौर वैसे तो काफी धर्मप्रिय थी, पर वह अपने बेटे की वजह से काफी परेशान रहती थी, एक बार तीर्थ यात्रा के दौरान जब वे मथुरा (Mathura) और वृंदावन (Vrindavan) पहुंची तो उन्होंने श्री कृष्ण मंदिर बनाने की इच्छा जताई, तब स्वप्न में स्वयं श्री कृष्ण ने उन्हें दर्शन देकर गंगा किनारे कनखल में मंदिर के निर्माण का आदेश दिया। मंदिर में स्थापित राधा-कृष्ण की मूर्ति हर दिन अपना रूप बदलती है। भक्तों को मंदिर में अलग-अलग रूप में राधा-कृष्ण के दर्शन होते हैं। मंदिर में श्री कृष्ण की मूर्ति पारस पत्थर से निर्मित हैं, और राधा जी की मूर्ति संगमरमर से बनाई गई हैं। राधा -कृष्ण मंदिर को सिद्ध और जागृत माना जाता है। तिलक पत्रिका पर देखें हमारे हरिद्वार संवाददाता आशु शर्मा की विशेष रिपोर्ट।
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