Duvidha 4 mere Krishna ki imotional song lyrics | Bhaktistatus544 jay Shri Krishna
Автор: Bhakti Status 544
Загружено: 2026-02-15
Просмотров: 551
Описание:
Duvidha 4 mere Krishna ki imotional song lyrics | Bhaktistatus544 jay Shri Krishna
Duvidha 4 mere krishan ki is another Hindi rap song by , and we have received so much love from you all on Instagram and other platforms. Thanks a lot, guys, for showing so much love and keeping supporting.
This Hindi rap song is about all the problems Shree Krishna faced in his life and letting people know that God also faced issues in his life, but he did his karma no matter what the situation. He stood strong for protecting the dharma and this rap song shows the reality behind the limelight of being a god, and to create awareness among the young generation about their religion and reality.
Lyrics Of The Song :
जन्म से जो शुरू थी, वो मौत पे ही खत्म है
दुनिया समझे लीला, पर मेरे सीने में ज़ख्म है
त्रिकालदर्शी होकर भी, मैं बन गया था मूक
देख रहा था अपनों की, मैं एक-एक चूक
रथ का सारथी बना, पर मन मेरा भी भारी था
कुरुक्षेत्र की भूमि पर, वो कैसी तैयारी थी?
सामने खड़े थे भीष्म, गुरु द्रोण भी लाचार थे
जिनकी गोद में खेला, आज वो ही शिकार थे।
मैं रोक सकता था समय, मैं मोड़ सकता था तीर को
पर विधि के आगे मैंने, झुका दिया शरीर को
अभिमन्यु जब घिरा था, मैं सब कुछ था जानता
पर नियति के पन्नों पे, लिखा वो आघात था
गांधारी की आँखों से, जो गिरा वो अंगार था
मेरे पूरे वंश का, उसमें छुपा संहार था
माँ के उस श्राप को, सम्मान मैंने दे दिया
अपने ही कुल का बलिदान मैंने दे दिया।
कहने को द्वारिकाधीश, पर घर मेरा भी टूटा
मेरे ही सामने मेरा, यदुवंश पूरा फूटा
मदिरा के नशे में, मेरे भाई लड़ मर गए
कल तक थे जो रक्षक, वो काल बनके भिड़ गए
सोने की वो नगरी, पानी में समा रही थी
मेरी ही बनाई दुनिया, मुझको डरा रही थी।
बांसुरी की धुन तो, हो गई कब की मौन
सनाटा ही साथी था, और मेरा था ही कौन?
राधा भी नहीं थी पास, रुक्मिणी भी दूर थी
ईश्वर होकर भी मेरी, हालत मज़बूर थी।
जंगल में था लेटा, जब वो तीर पैर में आ लगा
शायद उसी पल मेरा, सोया नसीब जगा
ज़रा को मत कोसो, वो तो निमित्त मात्र था
इस नाटक के अंत का, वो आखिरी पात्र था
खून जब बहा मेरा, तब मिली मुझे शांति
मिट गई थी मन से, वो जीवन की भ्रांति।
न जीत का जश्न था, न हार का कोई गम
बस धीरे-धीरे थम रहे थे, मेरी सांसों के दम
न तीर का था दुख, न ज़ख्मों का निशान
मैं खुद ही था शिकार, और खुद ही था कमान
जिस 'विधाता' ने ये सारा,.खेल रचाया...
मिट्टी में मिल गया... वो माटी का भगवान।"
Made with love from our team
#duvidha #duvidha2 #krishna #lucke #raanjha #krishnabhajan #krishnastatus #krishnalove #krishnabhakti #krishnavani #krishnajanmashtami #krishnaconsciousness #krishnaleela #radhakrishna #radhakrishnasongs #radha #radharani #radhakrishnastatus #radhakrishnalove
Повторяем попытку...
Доступные форматы для скачивания:
Скачать видео
-
Информация по загрузке: