धीरज धर मनुवा (गुप्त योग की यात्रा) | आज की मुरली पर अधारित गीत | 10/01/26
Автор: BK New Songs
Загружено: 2026-01-09
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धीरज धर मनुवा, धीरज धर मनुवा,
गुप्त है ये यात्रा, धीरज धर मनुवा।
याद की डोर थामे, चल रहे हैं हम,
मुक्तिधाम की ओर, धीरज धर मनुवा॥
अंतरा – 1:
न दिखाई दे राह, न कोई निशान,
फिर भी बाबा कहते – बस याद में रह जाना।
देह का भान छोड़, आत्मा बन उड़ जाना,
पण्डा है शिवबाबा, वही ले जाएगा॥
धीरज धर मनुवा, धीरज धर मनुवा…
अंतरा – 2:
स्थूल से सूक्ष्म बने, फरिश्ता स्वरूप,
हड्डी-हड्डी स्वाहा, यही है सच्चा पुरुषार्थ रूप।
दधीचि सा त्याग, रूहानी सेवा अपार,
व्यक्त से अव्यक्त बनने का यही आधार॥
धीरज धर मनुवा, धीरज धर मनुवा…
अंतरा – 3:
ना शोर है, ना युद्ध, ना ढोल-नगाड़ा,
ये है शान्ति की यात्रा, सबसे निराला।
मनमनाभव का मंत्र, मध्याजी भव की राह,
बाबा की श्रीमत पर, मिलती है बादशाह॥
धीरज धर मनुवा, धीरज धर मनुवा…
अंतरा – 4:
विनाश की सीन भी हिला न पाए,
महावीर बच्चे, अडोल बन जाएँ।
जो देखा अर्जुन ने, वही हम देखेंगे,
स्थापना के बाद, स्वर्ग में राज करेंगे॥
धीरज धर मनुवा, धीरज धर मनुवा…
अंतरा – 5:
न देह का बंधन, न संबंधों का जाल,
जीवनमुक्त स्थिति, यही फरिश्ता कमाल।
कोशिश नहीं, अब सहज बन जाना है,
देहभान छोड़, बाबा में समा जाना है॥
धीरज धर मनुवा, धीरज धर मनुवा…
अंतिम पंक्तियाँ (समापन):
कर्म हैं दर्पण, आत्मा का दर्शन कराएँ,
शक्ति स्वरूप बन, बाप को प्रत्यक्ष कराएँ।
अव्यक्त वतन की तैयारी अभी से कर ले,
धीरज धर मनुवा… बाबा संग चल ले॥
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