मैं अब क्या करूं रामा.,चरण रज मनवा तोरी चाहे-मन सीताराम चरण में लगा लो 8 मार्च 2026 सीताराम संकीर्तन
Автор: HANUMAN DAS HARISH
Загружено: 2026-03-08
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क्यों मुख फेर लिया मो से, राम जी.. फेर लिया काहे
रात दिन चैन नहीं मो को, घरी-घरी मनवा भरे आहें
प्रभु तेरे मिलन बिन.. चैन ना मुझको
दर्द ये मन का.. क्या दीखे ना तुझको
चरणों में रख लो न.., ना छोडो मेरी बाहें
रात दिन चैन नहीं मो को, घरी-घरी मनवा भरे आहें
क्यों मुख फेर लिया मो से, राम जी.. फेर लिया काहे
मानूं मुझमें बहुत बुराई, शायद तुमको मन नहीं भाई
पापी अनेकों क्या तूने ना तारे, अब काहे प्रभु देर लगाईं
मैं अब क्या करूं रामा.., चरण रज मनवा तोरी चाहे
क्यों मुख फेर लिया मो से, राम जी.. फेर लिया काहे
रात दिन चैन नहीं मो को, घरी-घरी मनवा भरे आहें
दास पवनसुत.. भया मैं जब सों, आस पाल ली मनवा ये
संग में बिठा लो.. प्रभु मुझको भी, जहां पवनसुत बैठत रे
कौन सों मुश्किल आपको राम जी,
कृपा यदि आप करन चाहें, करुणा यदि आप करन चाहें
रात दिन चैन नहीं मो को, घरी-घरी मनवा भरे आहें
क्यों मुख फेर लिया मो से, राम जी.. फेर लिया काहे
जय श्रीसीताराम
हनुमान दास हरीश
91 72177 43932
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