ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव) के माता-पिता कौन? सत्संग नितिन साहिब जी बदलापुर महाराष्ट्र
Автор: मूलज्ञान कबीर साहेब
Загружено: 2026-02-15
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“ज्यों नैनों में पुतली, त्यों मालिक घट माहिं” — यह अमृत वाणी हमें बताती है कि परमात्मा कहीं दूर नहीं, हमारे अपने ही अंतर में विराजमान है। जैसे आँख की पुतली सदा भीतर रहती है, वैसे ही मालिक हमारे हृदय-घट में सदा उपस्थित है।
“मूरख लोग न जानहिं, बाहर ढूँढन जाहिं” — अज्ञानवश मनुष्य उसे बाहर तीर्थों, मंदिरों और स्थानों में खोजता है, जबकि सच्चा मार्ग आत्मज्ञान और अंतर की साधना से खुलता है।
इस सत्संग का संदेश है —
✨ आत्मज्ञान प्राप्त करो
✨ सत्य को पहचानो
✨ सतनाम की भक्ति करो
सतनाम ही सच्चा सहारा है। 🙏
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