सुभद्रा कुमारी चौहान - राही || Subhadra Kumari Chauhan ki kahani - Raahi ||UGC NET Hindi syllabus
Автор: Suhana Safar with Kalpana
Загружено: 2025-07-18
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सुभद्रा कुमारी चौहान - राही || Subhadra Kumari Chauhan ki kahani - Raahi ||UGC NET Hindi syllabus
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Rahi Kahnai राही और अनिता दो पात्रों के इर्द-गिर्द घूमती है. राही चोरी के अपराध के कारण जेल में है, तो अनीता सत्याग्रह के कारण. राही की ज़िन्दगी की कहानी कैसे अनिता को देशभक्ति की वास्तविक परिभाषा समझाती है, यही इस कहानी में वर्णन किया गया है. गरीबों की पीड़ा का वर्णन करती ये कहानी जहाँ एक ओर सत्याग्रही की चादर में लिपटे सत्तालोलुप व्यक्तियों पर एक व्यंग्य है, वहीं सच्ची देशभक्ति और मानवता का पाठ भी पढ़ाती है.
सुभद्रा कुमारी चौहान (१६ अगस्त १९०४-१५ फरवरी१९४८) का जन्म नागपंचमी के दिन इलाहाबाद के निकट निहालपुर नामक गांव में रामनाथसिंह के जमींदार परिवार में हुआ था। वह हिन्दी की सुप्रसिद्ध कवयित्री, लेखिका और स्वतंत्रता सेनानी थीं। उनके दो कविता संग्रह तथा तीन कथा संग्रह प्रकाशित हुए पर उनकी प्रसिद्धि झाँसी की रानी कविता के कारण है। उनके काव्यसंग्रह हैं: मुकुल और त्रिधारा । उनके कहानी संग्रह हैं: बिखरे मोती-१९३२ (१५ कहानियाँ), उन्मादिनी-१९३४ (९ कहानियाँ), सीधे साधे चित्र-१९४७ (१४ कहानियाँ)। सुभद्रा कुमारी चौहान ने कुल ४६ कहानियां लिखी।
सुभद्राकुमारी चौहान का देश के स्वतंत्रता संग्राम में भी उनका अमूल्य योगदान रहा है। उत्तर भारत के राजनैतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक जीवन में सुभद्रा जी के व्यक्तित्व की गहरी छाप रही है। केवल 44 वर्ष की अल्पायु में किसी देश और जातीय अस्मिता को इतना विपुल योगदान देने वाली उनके जैसी दूसरी कोई महिला इतनी जल्दी याद नहीं आती है।
सुभद्राकमारी चौहान अपने नाटककार पति लक्ष्मणसिंह के साथ शादी के महज डेढ़ साल के भीतर ही सत्याग्रह में शामिल हो गईं और जेलों में ही जीवन के अनेक महत्त्वपूर्ण वर्ष गुजारे। गृहस्थी और नन्हे-नन्हे बच्चों का जीवन सँवारते हुए उन्होंने समाज और राजनीति की सेवा की। देश के लिए कर्तव्य और समाज की जिम्मेदारी सँभालते हुए उन्होंने व्यक्तिगत स्वार्थ की बलि चढ़ा दी|
सुभद्राकुमारी की कविता 'झाँसी की रानी' महाजीवन की महागाथा है।
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