Kabir saheb bhajan ||Acharya prashant||Bhajan पिया मोरे जागे|| आचार्य जी भजन||
Автор: Kabir Saheb Bhajan
Загружено: 2023-11-07
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Описание: मन तो पचास जगह रिश्ते बनाता है। वो सब रिश्ते मन के खेल हैं, मन का नशा हैं, काल के संयोग हैं। रिश्ते बहुत विवेक से बनाओ, संगति से बड़ी कोई बात नहीं। रिश्ते का प्रभाव क्या हो रहा है तुम पर? उठ रहे हो कि गिर रहे हो? आँखें खुल रही है या नशा गहरा रहा है?
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