Kishore Kumar का समाधि स्थल and ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर (मध्य प्रदेश) में पांच मंजिलें
Автор: Nitu Desi lifestyle
Загружено: 2026-03-02
Просмотров: 70
Описание:
• Jyotirling and Char Dham
• Bullet train and another infrastructure pr...
• Mumbai metro
• Varanasi tour 2024
• Lodha and Dombivli property
#nitudesilifestylecooking
• Bullet train and another infrastructure pr...
#nitudesilifestylecooking
• Runwal garden City dombivli property
• Mumbai metro
• Dholera smart city
• Jyotirling and Char Dham
• Ayodhya tour 2024
• Varanasi tour 2024
• Lodha and Dombivli property
• Bullet train and another infrastructure pr...
#nitudesilifestylecooking
• Runwal garden City dombivli property
• Mumbai metro
• Dholera smart city
• Sweets recipes
• Mumbai vlog
• Mumbai vlog
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग का इतिहास (Hindi Details)
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह मध्यप्रदेश में नर्मदा नदी के बीच मंधाता द्वीप पर स्थित है। इस द्वीप का आकार ॐ (ओम) जैसा माना जाता है, इसलिए इसका नाम ओंकारेश्वर पड़ा।
🔱 पौराणिक कथा
पुराणों के अनुसार एक बार विन्ध्य पर्वत ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की।
भगवान शिव प्रसन्न होकर प्रकट हुए और वरदान माँगने को कहा।
विन्ध्य पर्वत ने कहा कि उसे शक्ति मिले ताकि वह सबसे बड़ा पर्वत बन सके।
भगवान शिव ने उसे आशीर्वाद दिया और वहीं ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए।
उसी स्थान पर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग स्थापित हुआ।
🔱 ओंकारेश्वर और ममलेश्वर
नर्मदा नदी के बीच द्वीप पर ओंकारेश्वर मंदिर है।
नदी के किनारे ममलेश्वर मंदिर है।
मान्यता है कि दोनों मिलकर एक ज्योतिर्लिंग बनाते हैं।
दोनों मंदिरों के दर्शन करना शुभ माना जाता है।
🔱 ऐतिहासिक जानकारी
यह मंदिर बहुत प्राचीन है, माना जाता है कि यहाँ पूजा हजारों वर्षों से हो रही है।
प्राचीन काल में कई राजाओं ने मंदिर का निर्माण और जीर्णोद्धार कराया।
मराठा काल में मंदिर का विकास हुआ।
आज यह भारत के सबसे प्रसिद्ध शिव तीर्थों में से एक है।
🔱 धार्मिक महत्व
नर्मदा नदी को पवित्र नदी माना जाता है।
यहाँ नर्मदा परिक्रमा करने वाले श्रद्धालु अवश्य आते हैं।
सावन और महाशिवरात्रि में यहाँ बहुत भीड़ होती है।
🔱 विशेष मान्यता
ओंकारेश्वर में दर्शन करने से सभी पापों का नाश होता है।
मनोकामना पूरी होने की मान्यता है।
इसे मोक्षदायिनी तीर्थ भी कहा जाता है।
Kishore Kumar का समाधि स्थल Khandwa (मध्य प्रदेश) में स्थित है। यह स्थान उनके प्रशंसकों के लिए एक श्रद्धास्थल माना जाता है।
जानकारी:
किशोर कुमार का जन्म और निधन दोनों ही खंडवा से जुड़े हैं।
उनकी इच्छा थी कि उनका अंतिम संस्कार खंडवा में ही हो, इसलिए उनकी समाधि खंडवा में बनाई गई।
यहाँ हर साल उनके जन्मदिन (4 अगस्त) और पुण्यतिथि (13 अक्टूबर) पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम होते हैं।
कई लोग यहाँ जाकर उनके गीत गाकर श्रद्धांजलि देते हैं।
खास बात
किशोर कुमार अक्सर कहा करते थे:
"दूध-जलेबी खाएंगे, खंडवा में बस जाएंगे"
इसलिए खंडवा शहर से उनका विशेष लगाव था।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर (मध्य प्रदेश) में पांच मंजिलें (five floors) हैं। यह अनूठा मंदिर उत्तर भारतीय वास्तुकला शैली में बना है और इसके प्रत्येक तल पर अलग-अलग देवता स्थापित हैं, जिसमें ओंकारेश्वर, महाकालेश्वर, सिद्धनाथ, गुप्तेश्वर और ध्वजधारी शिखर देवता शामिल हैं।
Behind Every Temple
Behind Every Temple
+2
ओंकारेश्वर मंदिर के 5 तलों की विशेषताएं:
तल (Floors): मंदिर में कुल 5 मंजिलें हैं।
स्थापना: निचले तल से ऊपर तक, क्रमशः श्री ओंकारेश्वर, श्री महाकालेश्वर, श्री सिद्धनाथ, श्री गुप्तेश्वर और ध्वजधारी शिखर देवता स्थापित हैं।
अनोखी विशेषता: नागचंद्रेश्वर की प्रतिमा तीसरी मंजिल पर है, जिसके दर्शन केवल नागपंचमी के दिन होते हैं।
वास्तुकला: मंदिर में 40 से 60 विशाल स्तंभों पर टिका एक बड़ा सभा मंडप है।
Behind Every Temple
Behind Every Temple
+3
यह 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है, जो नर्मदा नदी के बीच मंधाता द्वीप पर स्थित है।
Повторяем попытку...
Доступные форматы для скачивания:
Скачать видео
-
Информация по загрузке: