Anand strot Bah Raha to kyon udaas Hai ।।Arya Samaj bhajan ।।
Автор: Arya Samaj
Загружено: 2025-03-07
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स्वर - मिथिलेश शास्त्री
आनंद स्रोत बह रहा, पर तू उदास है
owner- believe music
आनन्द स्त्रोत बह रहा, पर तू उदास है।
अचरज है जल में रहकर भी, मछली को प्यास है।।1।।
आनन्द स्त्रोत बह रहा, पर ……..
फूलों में ज्यों सुवास है, ईख में मिठास है।
भगवान् का त्यों विश्व के, कण-कण में वास है। ।।2।।
आनन्द स्त्रोत बह रहा, पर ………
टुक ज्ञानचक्षु खोलकर, तू देख तो सही।
जिसको तू ढूँढ़ता है वह, सदा तेरे पास है ।।3।।
आनन्द स्त्रोत बह रहा, पर……..
कुछ तो समय निकाल, आत्म शुद्धि के लिए।
नर जन्म का उद्देश्य न केवल विलास है।। ।।4।।
आनन्द स्त्रोत बह रहा, पर …..
आनंद, मोक्ष को ना पा, सकेगा तब तलक तू।
जब तलक ‘प्रकाश’, इन्द्रियों का दास है। ।5।।
आनन्द स्त्रोत बह रहा, पर …….
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