गीता अध्याय 1 श्लोक 3 | दुर्योधन का द्रोणाचार्य से संवाद | Bhagavad Gita 1.3 Meaning
Автор: Adarsh Adhyatm
Загружено: 2026-03-09
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नमस्कार दोस्तों 🙏
इस वीडियो में हम श्रीमद् भगवद गीता के अध्याय 1 के तीसरे श्लोक
"पश्यैतां पाण्डुपुत्राणामाचार्य महतीं चमूम्..." का अर्थ और गहरा भाव समझेंगे।
इस श्लोक में दुर्योधन अपने गुरु द्रोणाचार्य को पाण्डवों की विशाल सेना दिखाते हुए कहता है कि देखिए, पाण्डु पुत्रों की यह बड़ी सेना आपके ही बुद्धिमान शिष्य द्रुपद पुत्र धृष्टद्युम्न द्वारा युद्ध के लिए व्यवस्थित की गई है।
इस वीडियो में आप जानेंगे:
• श्लोक का सही उच्चारण
• शब्दार्थ और सरल हिंदी अर्थ
• श्लोक का गहरा आध्यात्मिक अर्थ
• जीवन में इसका क्या महत्व है
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जय श्री कृष्ण 🙏
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