सिल्ला साणेश्वर महाराज की जग्गी / 9 दिनों के बाद गई डोली अंदर
Автор: Mahesh negi uk
Загружено: 2026-02-03
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सिल्ला साणेश्वर महाराज (Silla Saneshwar Maharaj) का स्थान और उनकी 'जग्गी' (जागीर या पवित्र स्थान) मुख्य रूप से उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र, विशेषकर अल्मोड़ा जिले से जुड़ी हुई है।
सिल्ला साणेश्वर को भगवान शिव का ही एक स्वरूप माना जाता है। यहाँ उनसे जुड़ी कुछ प्रमुख जानकारियां दी गई हैं:
प्रमुख स्थान और महत्व
स्थान: इनका मुख्य मंदिर अल्मोड़ा जिले के सिल्ला (Silla) गाँव के समीप स्थित है।
आस्था: स्थानीय लोग इन्हें न्याय के देवता और रक्षक के रूप में पूजते हैं। माना जाता है कि साणेश्वर महाराज अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं और पशुधन की रक्षा करते हैं।
जागर और जग्गी: कुमाऊं की लोक संस्कृति में 'जग्गी' का अर्थ उनके पवित्र स्थान या थान से होता है। यहाँ अक्सर जागर (देवताओं का आह्वान) का आयोजन किया जाता है, जिसमें साणेश्वर महाराज की महिमा का गुणगान किया जाता है।
सांस्कृतिक महत्व
साणेश्वर महाराज की पूजा में ढोल-दमाऊ की थाप पर देवताओं को अवतरित किया जाता है। स्थानीय मेलों और त्योहारों के दौरान यहाँ भारी भीड़ उमड़ती है। इन्हें अक्सर "साण" (बैल) के प्रतीक से भी जोड़ा जाता है, जो भगवान शिव के वाहन नंदी का प्रतिनिधित्व करता है।
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साणेश्वर महाराज की जग्गी
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सिल्ला साणेश्वर महाराज
साणेश्वर महाराज
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