जय भोलेनाथ | Original Bholenath Aarti | Infinite Gaana 2026
Автор: Infinite Gaana
Загружено: 2026-01-29
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Lyrics
जय जय भोलेनाथ, करुणा के सागर
डमरू की धुन में, गूंजे नभ-अंबर
जय जय भोलेनाथ, कैलाश के वासी
शरण में जो आए, दुख उसके नाशी
भस्म विभूषित तन, जटाओं में गंगा
चंद्र ललाट सोहे, अद्भुत ये रंगा
नाग गले में शोभे, नीलकंठ नाम
त्रिलोक के स्वामी, तुम ही भगवान
जय जय भोलेनाथ, करुणा के सागर
डमरू की धुन में, गूंजे नभ-अंबर
भोले भंडारी तुम, सबके हो दाता
रंक हो या राजा, सबको अपनाता
भक्तों की नैया, पार लगाओ
भव सागर से प्रभु, मुक्त कराओ
जय जय भोलेनाथ, कैलाश के वासी
शरण में जो आए, दुख उसके नाशी
सावन की रिमझिम, मन हरषाए
हर हर महादेव, कण-कण गाए
आँसू हों या हो, मन की पुकार
एक लोटा जल से, हो जाए उद्धार
जय जय भोलेनाथ, करुणा के सागर
डमरू की धुन में, गूंजे नभ-अंबर
आरती उतारें हम, श्रद्धा के संग
जीवन उज्जवल हो, मिटे हर भंग
नित गाएँ महिमा, दिन और रात
जय हो जय हो, श्री भोलेनाथ
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