भगवद गीता 2.26-30 2 प्रकार के सत्य सापेक्ष और शाश्वत
Автор: Bhagavat Connect
Загружено: 2026-02-21
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रिलेटिव ट्रुथ (व्यवहारिक सत्य)
यह "ट्रांज़ैक्शनल" या कंडीशनल ट्रुथ है। यह हमारी रोज़मर्रा की असलियत को बताता है—नाम, रूप और बदलावों की दुनिया।
नेचर: टेम्पररी और समय के अधीन।
उदाहरण: कहना "बारिश हो रही है" या "मैं एक टीचर हूँ।" यह अभी सच है, लेकिन यह 100 साल पहले सच नहीं था और 100 साल बाद भी सच नहीं होगा।
2. एब्सोल्यूट ट्रुथ (पारमार्थिक सत्य)
यह सबसे बड़ी, कभी न बदलने वाली असलियत है। गीता में, कृष्ण इसे आत्मा या ब्रह्म के रूप में बताते हैं।
नेचर: हमेशा रहने वाला, बिना जन्म का और बिना मौत का। यह समय, जगह या हालात के बावजूद सच रहता है।
उदाहरण: वह अंदरूनी चेतना जो शरीर और दुनिया के बदलने पर भी मौजूद रहती है।
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